मुख्यपृष्ठस्तंभकोर्ट-रूम : झूठा दावा और फर्जी डिक्री भी अपराध

कोर्ट-रूम : झूठा दावा और फर्जी डिक्री भी अपराध

धारा २४४, २४५ और २४६
भाग:८२
एड. कनई बिस्वास
न्यायालय की प्रक्रिया का इस्तेमाल संपत्ति बचाने, फर्जी देनदारी खड़ी करने या झूठा दावा करने के लिए नहीं किया जा सकता। भारतीय न्याय संहिता की धारा २४४, २४५ और २४६ ऐसे कपटपूर्ण कृत्यों को अपराध बनाती हैं।
केस स्टडी – १: ‘संपत्ति पर कपटपूर्ण दावा’ (धारा २४४)
एक व्यापारी की संपत्ति डिक्री के निष्पादन में ली जानी थी। उसके रिश्तेदार ने झूठा दावा कर दिया कि संपत्ति उसकी है, ताकि उसे कानूनी कार्रवाई से बचाया जा सके।
अदालत क्या देखेगी?
क्या संपत्ति जब्ती या डिक्री के निष्पादन में लिए जाने योग्य थी?
क्या आरोपी ने उस पर ऐसा दावा किया जिसे वह जानता था कि उसका कोई अधिकार नहीं है?
क्या दावा बेईमानी या कपट से किया गया?
पैâसला – आवश्यक तत्व सिद्ध होने पर धारा २४४ के तहत कार्रवाई हो सकती है।
समझें: कानूनी जब्ती या डिक्री के निष्पादन से संपत्ति बचाने के लिए उस पर कपटपूर्ण दावा करना अपराध है।
केस स्टडी – २: ‘देय न होने पर भी डिक्री होने देना’ (धारा २४५)
एक व्यापारी ने मित्र के साथ मिलकर अदालत में फर्जी देनदारी दिखाई। उसने जानबूझकर मुकदमे का विरोध नहीं किया और ऐसी रकम की डिक्री होने दी जो वास्तव में देय ही नहीं थी।
अदालत क्या देखेगी?
क्या रकम वास्तव में देय नहीं थी?
क्या आरोपी ने जानते हुए अपने विरुद्ध डिक्री होने दी?
क्या उसने यह काम बेईमानी या कपट से किया?
पैâसला-तथ्य सिद्ध होने पर धारा २४५ के तहत कार्रवाई हो सकती है।
समझें: धारा २४५ केवल रकम तक सीमित नहीं है। ऐसी संपत्ति के संबंध में भी कपटपूर्वक डिक्री होने देना अपराध हो सकता है, जिस पर डिक्री पाने वाला वास्तव में हकदार नहीं है।
केस स्टडी – ३: ‘अदालत में बेईमानी से झूठा दावा’ (धारा २४६)
एक व्यक्ति ने पड़ोसी की जमीन पर अपना कोई अधिकार न होने की जानकारी के बावजूद अदालत में उस जमीन पर मालिकाना हक का दावा कर दिया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी ने अदालत में दावा किया था?
क्या वह जानता था कि दावा झूठा है?
क्या दावा बेईमानी या कपट से किया गया था?
पैâसला-ये तत्व सिद्ध होने पर धारा २४६ के तहत कार्रवाई हो सकती है।
समझें: केवल मुकदमा हार जाना या दावा साबित न कर पाना धारा २४६ का अपराध नहीं है। यह साबित होना जरूरी है कि दावा करने वाला उसे झूठा जानता था और उसने बेईमानी या कपट से दावा किया।
धारा २४४ से २४६ का संदेश साफ है—अदालत की प्रक्रिया का इस्तेमाल झूठे संपत्ति-दावे, फर्जी देनदारी या जानबूझकर झूठे मुकदमे के लिए करना आपराधिक जिम्मेदारी पैदा कर सकता है।
(अगले अंक में: धारा २४७, २४८ और २४९ – देय न होने वाली रकम की डिक्री कपटपूर्वक प्राप्त करना, नुकसान पहुंचाने के इरादे से झूठा आपराधिक आरोप लगाना तथा अपराधी को शरण देने से जुड़े अपराधों को सरल उदाहरणों से समझेंगे।)

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