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भाजपा की ‘इनसाइड गेम’ … शहाजीबापू की हार में भाजपा का हाथ?

मंत्री जयकुमार गोरे के विस्फोटक खुलासे से बवाल
देशमुख को विधायक बनवाने का किया दावा
सामना संवाददाता / मुंबई
भाजपा के कथित ‘इनसाइड गेम’ को लेकर सांगोला की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है। शिंदे गुट के नेता शहाजीबापू पाटील की विधानसभा चुनाव में हुई हार के पीछे भाजपा का हाथ होने की चर्चा फिर जोर पकड़ रही है। इस पूरे विवाद की वजह बना है सोलापुर के पालकमंत्री जयकुमार गोरे का विस्फोटक बयान, जिसमें उन्होंने शेकाप विधायक डॉ. बाबासाहेब देशमुख को चुनाव जिताने में खुद की भूमिका का दावा किया है। गोरे के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। विपक्ष जहां इस बयान के राजनीतिक अर्थ निकालने में जुट गया है, वहीं शहाजीबापू पाटील ने सावधानी भरा रुख अपनाते हुए कहा है कि चुनाव में भाजपा ने मेरी मदद ही की थी। मंत्री शायद भावनाओं में बहकर कुछ बोल गए। इस पूरे घटनाक्रम से सियासत में गर्मी लौट आई है।
उल्लेखनीय है कि सांगोला विधानसभा चुनाव का परिणाम त्रिकोणीय मुकाबले में स्पष्ट रूप से सामने आया था। शिंदे गुट से शहाजीबापू पाटील को ९०,२७८ मत मिले, जबकि शेकाप के डॉ. बाबासाहेब देशमुख ने १,१६,२५६ मत हासिल कर जीत दर्ज की। ये आंकड़े बताते हैं कि शहाजीबापू की हार स्पष्ट थी, लेकिन जयकुमार गोरे के बयान ने इसे राजनीतिक विवाद में बदल दिया। भाजपा द्वारा कथित रूप से हस्तक्षेप और गोरे का अपना दावा, दोनों मिलकर सांगोला की राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहे हैं, जिससे अगले विधानसभा चुनाव की रणनीतियों पर भी असर पड़ने की संभावना है।

बचाव करते दिखे पाटील
शहाजीबापू पाटील ने अपने बयान में इस विवाद को संतुलित रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनका पराभव स्वास्थ्य संबंधी कारणों से हुआ और भाजपा द्वारा किसी प्रकार की मदद केवल भावनाओं में कही गई बात थी। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि २०२९ के विधानसभा चुनाव में सांगोला से शिंदे गुट का ही विधायक चुना जाएगा। इस तरह शहाजीबापू ने जयकुमार गोरे के बयान को नकारते हुए अपने समर्थकों और गुट के कार्यकर्ताओं के मनोबल को मजबूत करने की कोशिश की, ताकि आगामी चुनाव में किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति न बने।

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