मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 2017 में सरकार बनने के बाद गुंडों और शोहदों से राज्य में युवतियों एवं महिलाओं को बचाने के लिए पुलिस की एंटी रोमियो यूनिट और अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई काफी लोकप्रिय हुई थी। लेकिन जैसे-जैसे योगी सरकार का कार्यकाल आगे बढ़ा, इनकी हनक घटती गई। पिछले कुछ दिनों के भीतर राज्य में तेजी से ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं, जिनमें छेड़छाड़ की शिकार महिला और उसके परिजनों द्वारा जब इस हरकत पर आपत्ति जताई गई, तो शोहदों ने परिजनों को भी पीटा। ऐसे में युवतियों और उनके परिजनों को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है, लेकिन शोहदों पर लगाम कसती नहीं दिख रही है।
पहली घटना चित्रकूट की है। जहां कोचिंग से घर लौट रही एक 19 वर्षीय छात्रा के साथ युवकों ने छेड़खानी की। विरोध करने पर शोहदों ने घर में घुसकर पीड़ित परिवार से मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पीड़िता ने बताया कि वह 21 जून को शाम 8 बजे कोचिंग से पढ़कर वापस घर लौट रही थी। वह एक स्कूल के पास पहुंची, जहां पहले से बैठे अमन मिश्रा, नसीमुद्दीन उर्फ चुन्नू, दीपक तिवारी और उनके साथ मौजूद कुछ अन्य लड़के नशा कर रहे थे। सभी अभद्र टिप्पणी करने लगे। विरोध करने पर उन्होंने जातिसूचक गाली-गलौज की। घर पहुंचने पर उसने घटना अपने पिता को बताई। जब पिता उन युवकों के पास गए, तो आरोपियों ने उन्हें मारने के लिए दौड़ा लिया। घर के अंदर घुसकर पिता के साथ जमकर मारपीट की। मानिकपुर थाना प्रभारी अजीत कुमार पांडेय ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है। जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।
दूसरी घटना सिद्धार्थनगर के बांसी कोतवाली क्षेत्र के एक गांव की है। जहां बकरी चराने जा रही किशोरी से छेड़खानी और मां-बेटी को पीटने के मामले में पुलिस ने तीन दिन बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीड़िता की मां ने कोतवाली में दी तहरीर में आरोप लगाया है कि उसकी बेटी शुक्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे बकरी चराने जा रही थी। इसी दौरान गांव निवासी शमसुल पुत्र शाकिर अली ने उसका हाथ पकड़कर छेड़खानी की और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए जबरन खींचने लगा। किसी तरह किशोरी वहां से भागकर घर पहुंची और घटना की जानकारी परिजनों को दी। आरोप है कि घटना की जानकारी मिलने पर वह अपनी बेटी के साथ आरोपी पक्ष से पूछताछ करने जा रही थी। रास्ते में शाकिर अली, उसकी पत्नी और दूसरे पुत्र इंदमामूल उर्फ पप्पू समेत अन्य लोगों ने दोनों को रोक लिया और बाल पकड़कर घसीटते हुए लात-घूसों, रॉड व लाठी-डंडों से मारपीट की। घटना में मां-बेटी को चोटें आई हैं। इस संदर्भ में कोतवाल मृत्युंजय पाठक ने बताया कि तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है।
तीसरी घटना देवरिया की है। यहां कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में छेड़खानी का विरोध करने पर दो शोहदे भाइयों ने किशोरी के पिता की पिटाई कर दी। बाद में घर पहुंचकर ईंट-पत्थर से हमला कर उन्हें घायल कर दिया। पीड़िता की मां की तहरीर के अनुसार, उनकी पुत्री दवा लेने गई थी। लौटते समय गांव के दो भाई उस पर अभद्र टिप्पणी कर रहे थे। इसका विरोध करने पर दोनों आरोपी गाली-गलौज करते हुए किशोरी के पिता से मारपीट करने लगे। किसी तरह वह बचकर घर पहुंचे। आरोप है कि कुछ देर बाद दोनों युवक उनके दरवाजे पर पहुंच गए और ईंट-पत्थर से हमला कर दिया। इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। पीड़िता का आरोप है कि जाते समय आरोपियों ने पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर दोनों भाइयों पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
चौथी घटना लखीमपुर खीरी के मझगई थाना क्षेत्र की है। जहां एक गांव में छेड़खानी का विरोध करने पर शोहदों और उनके साथियों ने घर में घुसकर धारदार हथियारों और लाठी-डंडों से पूरे परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में 22 वर्षीय युवती, उसका 14 वर्षीय भाई और उसकी मां लहूलुहान हो गए। गंभीर रूप से घायल युवती लखनऊ में भर्ती है। पीड़िता की मां ने स्थानीय पुलिस पर हीलाहवाली का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपकर आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।
घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को तत्काल पलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां पुत्री के सिर से लगातार खून बहने और हालत अत्यंत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल और फिर वहां से लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। पुलिस ने आरोपी विपिन कुमार और रवींद्र के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है। मामले की विवेचना की जा रही है और जल्द ही अग्रिम विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों पर मेहरबानी दिखाते हुए भारतीय न्याय संहिता की बेहद हल्की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस ने इस खौफनाक वारदात को महज साधारण मारपीट की धारा 115(2), अपमान करने की धारा 352 और सिर्फ धमकी की धारा 351(3) के तहत समेट दिया। क्षेत्र में चर्चा है कि घर में घुसकर आबरू पर हाथ डालने और धारदार हथियार से सिर फोड़ने पर भी पुलिस ने गृह-अतिचार, छेड़खानी और जान से मारने के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं क्यों नहीं लगाईं। इसी ढीली कार्रवाई के कारण आरोपी महज 151 शांति भंग में चालान के बाद खुलेआम घूमकर पीड़ित परिवार को धमका रहे हैं।
इस संदर्भ में पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग ने कहा, “मामला संज्ञान में है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। अगर इस मामले में पुलिस की लापरवाही सामने आएगी, तो दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”
