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मुंबई में एचआईवी/एड्स नियंत्रण परियोजना बंद करने का विरोध कार्यक्रम जारी रखने की मांग

मुंबई में एचआईवी/एड्स नियंत्रण और रोकथाम कार्यक्रम को बंद करने की हलचलों पर तीव्र चिंता व्यक्त की गई है और इस परियोजना को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अधिकार क्षेत्र में जारी रखने की मांग की गई है। संबंधित ज्ञापन (निवेदन) में सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में इस कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित किया गया है।
1998 से जारी कार्य
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के दिशानिर्देशों के अनुसार मुंबई जिला एड्स नियंत्रण संस्था (एमडीएसीएस) की स्थापना की गई थी। वर्ष 1998 से मुंबई में एचआईवी/एड्स नियंत्रण, रोकथाम, जनजागरूकता, परामर्श (काउंसिलिंग), जांच और उपचार सुविधाएं प्रदान करने का कार्य चल रहा है। संस्था के माध्यम से एचआईवी/एड्स रोकथाम, सुरक्षित रक्त आपूर्ति, यौन संचारित रोगों (एसटीआई) पर नियंत्रण, परामर्श, उपचार और सूचना प्रसार का कार्य किया जाता है। मुंबई के विभिन्न अस्पतालों, परामर्श केंद्रों, एआरटी (एआरटी) केंद्रों, सुरक्षा क्लीनिकों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के माध्यम से सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
पिछले वर्ष मुंबई में लगभग 7 लाख 96 हजार एचआईवी जांचें की गईं, जिनमें 2,749 नए मरीज पाए गए। इसके साथ ही, यौन रोगों से संबंधित लगभग 2 लाख 25 हजार जांचें किए जाने की जानकारी दी गई है।
एचआईवी अभी भी एक गंभीर चुनौती
एचआईवी/एड्स को पूरी तरह से ठीक करने वाली दवा अभी तक उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में 45 हजार से अधिक एचआईवी पीड़ित मरीज एआरटी (एआरटी) उपचार ले रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि नए संक्रमण को रोकना, उच्च जोखिम वाले समूहों में निवारक उपाय लागू करना और मरीजों के शरीर में वायरस की मात्रा को नियंत्रित रखना, इन सबके लिए इस कार्यक्रम को जारी रखना बेहद आवश्यक है।
हालांकि एचआईवी एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन यह सामान्य संपर्क से नहीं फैलता। असुरक्षित यौन संबंध, इंजेक्शन द्वारा नशीली दवाओं का सेवन, संक्रमित रक्त का उपयोग और एचआईवी पीड़ित मां से बच्चे में संक्रमण होना इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं। वेश्यावृत्ति से जुड़ी महिलाओं, समलैंगिक पुरुषों, ट्रांसजेंडर (तृतीयपंथी), इंजेक्शन से नशा करने वाले लोगों और जेल के कैदियों जैसे उच्च जोखिम वाले समूहों में जांच, जागरूकता और निवारक कार्यक्रम चलाने का काम जारी है। इन समूहों में हेपेटाइटिस बी और सी की जांच भी की जा रही है।
देश की आर्थिक राजधानी होने के कारण मुंबई में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर आते हैं। इस वजह से एक राज्य से दूसरे राज्य में एचआईवी संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए, ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि मुंबई में नियंत्रण प्रणाली को मजबूत बनाए रखना बेहद जरूरी है। मुंबई में हर साल हजारों रक्तदान शिविर आयोजित करके लाखों यूनिट रक्त एकत्र किया जाता है। साथ ही, एचआईवी से जुड़े सामाजिक कलंक (स्टिग्मा) और भेदभाव को कम करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
परियोजना बंद होने पर खतरा बढ़ने की आशंका
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि एचआईवी/एड्स नियंत्रण परियोजना बंद हो जाती है, तो नए संक्रमण को रोकने के प्रयासों को बड़ा झटका लग सकता है। उच्च जोखिम वाले समूहों तक पहुंचना, जांच का दायरा बढ़ाना, उपचार की निरंतरता बनाए रखना और जागरूकता अभियान चलाना मुश्किल हो जाएगा।
संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों का मुद्दा भी गरमाया
इस परियोजना के तहत दो दशकों से अधिक समय से सेवा दे रहे लगभग 430 संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं और उनके भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। आरोप लगाया गया है कि कई बार ज्ञापन देने और लगातार प्रयास करने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है।
महानगरपालिका से हस्तक्षेप की मांग
ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की गई है कि मुंबई में एचआईवी नियंत्रण के लिए कार्यरत प्रणाली और उपलब्ध जनशक्ति (मैनपावर) को बनाए रखने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका तुरंत हस्तक्षेप करे, परियोजना को जारी रखे और सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में आवश्यक निर्णय ले।

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