मुख्यपृष्ठनए समाचारमनपा की नाकामी पर चला मुंबई हाई कोर्ट का चाबुक!

मनपा की नाकामी पर चला मुंबई हाई कोर्ट का चाबुक!

-मुंबईकरों की शांति छीनकर सो रही मनपा को अदालत ने याद दिलाया उसका काम

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई को बिल्डरों की नॉइज पैâक्ट्री बनने में मनपा अधिकारियों की आपराधिक लापरवाही और सांठ-गांठ पूरी तरह से जिम्मेदार है। शहरभर में चल रहे कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स के नाम पर बिल्डर दिन-रात भारी भरकम शोर मचाकर मुंबईकरों का जीना दूभर कर रहे हैं और मनपा प्रशासन आंखें मूंदकर तमाशा देख रहा है। जनता जब प्रदूषण और कानफोड़ू शोर की शिकायतें लेकर पहुंचती है, तो मनपा अधिकारी कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी नोटिस का ढोंग रचकर अपनी जेबें भरने में व्यस्त हो जाते हैं। मुंबई हाई कोर्ट को आखिरकार मनपा को उसको काम याद दिलाने पड़े कि तय सीमा में शोर नियंत्रित करना अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है, न कि कोई खैरात। अदालत का यह रुख साफ साबित करता है कि मुंबई की जनता को बिल्डरों के रहमोकरम पर छोड़कर मनपा अपने कर्तव्यों से पूरी तरह भाग चुकी है।
बिल्डरों की दलाली छोड़ काम पर ध्यान दे मनपा
हवा और ध्वनि प्रदूषण से मुंबई का हर नागरिक घुट-घुट कर जीने को मजबूर है, लेकिन मनपा के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। स्थिति यह हो गई है कि अब कोर्ट को अधिकारियों को बच्चों की तरह पाठ पढ़ाना पड़ रहा है कि वे पूरे शहर को जोन में बांटकर मॉनिटिंरग करें और जवाबदेही तय करें। अदालत ने मनपा की मिलीभगत और हफ्ता वसूली के खेल को भांपते हुए सख्त चेतावनी तक दे डाली कि इस पावर का इस्तेमाल बिल्डरों को ब्लैकमेल करने के लिए न किया जाए। जब तक हाई कोर्ट ने मनपा की लचर कार्यशैली पर कड़ा थप्पड़ नहीं जड़ा, तब तक अधिकारी नींद से जागने को तैयार नहीं थे। यह मनपा की घोर नाकामी है कि उसके अपने नियमों को लागू करवाने के लिए आम जनता को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।

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