-राहुल ने बहस का न्योता भेजा, मंत्रीजी बुद्धिमत्ता का पैमाना लेकर बैठ गए!
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
दीपावली पर लोग मिठाइयां भेजते हैं, उपहार देते हैं, शुभकामनाएं देते हैं। मगर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐसा दिवाली संदेश भेजा कि सियासत में बहस छिड़ गई! राहुल बोले, मोदीजी, आमने-सामने बैठकर चर्चा कर लेते हैं। जगह आप चुनिए, मंच आप चुनिए, निर्णायक भी आप चुनिए। चाहें तो मोहन भागवतजी को ही बैठा दीजिए! अरे भिया, इससे ज्यादा सुविधाजनक निमंत्रण क्या होगा? मेजबान भी आप, मैदान भी आपका और अंपायर भी आपका!
राहुल ने अमेरिकी समझौते, वित्तीय व्यवस्था, अडानी प्रकरण, एपस्टीन मामले और विदेशी संबंधों के आरोपों पर सवाल उठाए। यहां आरोपों की सच्चाई तय नहीं हुई है, मगर सार्वजनिक बहस का प्रस्ताव तो सामने है। अब भिया, विश्वगुरु की तरफ से जवाब आया या नहीं, उससे पहले चेले मैदान में उतर गए! केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू बोले कि उच्चस्तरीय बहस परिपक्व लोगों के बीच होती है!
वाह भिया, गजबे हो गइल!
तो मंत्रीजी, बहस के लिए परिपक्वता का प्रमाणपत्र कौन जारी करेगा? क्या कोई नया विभाग खुलेगा, राष्ट्रीय बुद्धिमत्ता एवं बहस पात्रता आयोग?
अरे भिया, यदि गुरुजी कम बुद्धिमान हैं, जैसा कि आप सभी के फील्डिंग पर उतरने से साबित होता है और आपके बयान से भी तो विश्वगुरु को अतिरिक्त समय दे दीजिए! मोदीजी बीस मिनट बोलें, राहुल दस मिनट! सवालों के जवाब में बुद्धिमत्ता का अंतर भी अपने आप सामने आ जाएगा!
उधर, राहुल ने मानहानि के मुकदमों का भी हिसाब छेड़ दिया। उनका कहना है कि शायद उनके खिलाफ ४५ मानहानि मामले हैं। उन्होंने पूछा कि विदेशी संबंधों के आरोपों पर मुकदमा क्यों नहीं किया जाता? बात तो ठीक है।
अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी जवाब दिया कि बहस करनी है तो संसद में कीजिए और विपक्ष जवाब सुनने के लिए सदन में मौजूद भी रहे। बात में दम है, भाई! संसद में बहस होनी चाहिए। मगर आमने-सामने चर्चा का प्रस्ताव भी कोई अपराध नहीं!
राहुल के आरोपों का जवाब तथ्यों से दीजिए, राहुल की बुद्धिमत्ता नापने से नहीं। उनकी बुद्धिमत्ता का प्रमाण तो दिख ही रहा है कि एक अकेले के बयानों पर आपकी पूरी पार्टी परेशान है सड़कों पर उतरी है, बयानों पर बयान ठोक रही है। अरे भिया, दिवाली पर राहुल की ओर से शुभकामनाएं आई हैं, कोई युद्ध का न्योता नहीं! विश्वगुरु को भी तो हैप्पी दिवाली का जवाब देने दो चेलों!
कमाल हो गइल बा, सवालों की बहस शुरू होने से पहले ही बुद्धिमत्ता की परीक्षा चालू हो गइल?
