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अनिल देशमुख की गाड़ी पर हमले का मामला …सीएम की पुलिस ने दी थी अदालत में झूठी रिपोर्ट!

फॉरेंसिक रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई
सामना संवाददाता / मुंबई
विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अनिल देशमुख की कार पर हमला हुआ था। इसमें कार के शीशे टूटकर देशमुख के सिर पर लगे थे, लेकिन फडणवीस की नागपुर ग्रामीण पुलिस ने न्यायालय में यह झूठी रिपोर्ट दी कि ऐसी घटना हुई ही नहीं। हालांकि, विशेषज्ञों की फॉरेंसिक रिपोर्ट को पत्रकार वार्ता में पेश करके अनिल देशमुख ने इस घटना का वास्तविक सच सबके सामने रखा है।
अनिल देशमुख ने कहा कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मेरी कार पर हमला हुआ था। यह हमला पूर्वनियोजित था और बाद में इसे मेरे विरोधियों द्वारा राजनीतिक रंग देने का काम किया गया। इसमें पुलिस ने भी तटस्थ भूमिका न अपनाते हुए राजनीतिक दबाव में आकर जांच करते हुए इस हमले को झूठा साबित करने की कोशिश की। अनिल देशमुख ने कल आरोप लगाया कि फॉरेंसिक रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों की उपेक्षा करते हुए कार के शीशे लगाने वाली नागपुर की एक निजी कंपनी के मैनेजर की राय लेकर पुलिस ने ‘बी समरी’ रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की।
पूछे ये सवाल
शुरुआत में ही पुलिस ने खून के नमूने, मेरे कपड़े, कार में गिरे हुए कांच के टुकड़े, दोनों पत्थर सहित अन्य सामग्री परीक्षण के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा था। फॉरेंसिक लैब ने उनका विश्लेषण कर रिपोर्ट पुलिस को दी थी। इसके बावजूद मुंबई स्थित फॉरेंसिक लैब से पत्राचार क्यों किया गया? देशमुख ने कहा कि इसके लिए पुलिस अधीक्षकों पर किसका दबाव था, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
पुलिस की भूमिका संदिग्ध
फॉरेंसिक रिपोर्ट को देखकर यह कहा नहीं जा सकता कि हमला झूठा था। कार पर पत्थर फेंकने वाले दो व्यक्तियों की पहचान करना जरूरी था। लेकिन उस ओर ध्यान न देकर इस हमले को वैâसे झूठा बताया जाए, इसे ही पुलिस ने दिखाने की कोशिश की। इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है, ऐसा देशमुख ने कहा।

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