-दिवालिया सरकार ने मुंबई का चिकित्सा तंत्र भी किया ध्वस्त
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
महाराष्ट्र में महायुति सरकार की प्राथमिकताएं खुलकर जनता के सामने आ गई हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बैनरबाजी में मशगूल होकर अखबारों और होर्डिंग्स में खुद को चमकाने में लगे हैं, जबकि दूसरी तरफ मुंबई मनपा अस्पतालों के ५,५०० स्वास्थ्य कर्मी आज भी वेतन को मोहताज हैं। हालात ऐसे हैं कि जिन डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ के भरोसे शहर की जानें बचती हैं, उन्हें ही हर महीने की तय तिथि पर वेतन नहीं मिल रहा है। यह स्थिति साबित कर रही है कि महायुति की यह सरकार न केवल दिवालिया हो चुकी है, बल्कि उसने मुंबई का पूरा चिकित्सा तंत्र ध्वस्त कर दिया है।
आपला दवाखाना भी अछूता नहीं
यह हाल केवल मनपा अस्पतालों का ही नहीं, बल्कि मुंबई में आपला दवाखाना के कर्मचारियों का भी है। यहां भी वेतन समय पर नहीं मिलता। इतना जरूर है कि बड़ी संख्या में मरीज देखने पर इन्हें जो इंसेंटिव मिलता है, उससे बड़ी राहत मिल जाती है।
‘महायुति’ सरकार के राज में अस्पतालों का हाल बेहाल!
समय पर वेतन नहीं मिलने से मनपा अस्पतालों के स्वास्थ्य कर्मी काफी परेशान हैं। उनका घर चलाना मुश्किल हो रहा है। इन स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि महायुति के राज में अस्पतालों का हाल बेहाल हो गया है। मुंबई में मनपा के पांच मेडिकल कॉलेज व अस्पताल, पांच विशेष अस्पताल, १६ उपनगरीय अस्पताल, ३० प्रसूतिगृह और १९० डिस्पेंसरी में कुल ५,५०० ठेका स्वास्थ्यकर्मी कार्यरत हैं। इनमें करीब २,००० कर्मचारियों को मनपा, जबकि ३,५०० कर्मियों को एजेंसियों के जरिए वेतन दिया जाता है।
म्यूनिसिपल लेबर यूनियन के महासचिव प्रदीप नारकर ने बताया कि इनमें डॉक्टर, नर्स, टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट से लेकर डाटा ऑपरेटर तक सबको हर महीने १० तारीख तक तनख्वाह मिलनी चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि इनका वेतन महीने की २०-२५ तारीख तक लटका रहता है। कई बार तो अगले महीने तक भी पैसे नहीं मिलते, जिससे परिवार चलाना दूभर हो गया है। आलम यह है कि मुंबईकरों की जान बचाने वाले हाथ आज खुद दो वक्त की रोटी को मोहताज हैं।
आदेश की अवहेलना
मनपा में जिस समय शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की सत्ता थी, उस समय तत्कालीन मनपा आयुक्त ने साफ आदेश दिया था कि हर महीने १० तारीख तक इन कर्मियों को वेतन दिया जाए। मगर आज मनपा में करीब साढ़े तीन वर्षों से प्रशासक नियुक्त है, जिसकी बागडोर महायुति सरकार के हाथ में है। ऐसे में सरकार के इशारों पर मनपा उस आदेश की खुलेआम अवहेलना कर रही है। नतीजतन, इन डॉक्टरों और नर्सों को न समय पर वेतन, न किराया चुकाने और परिवार संभालने की गारंटी मिलती है।
सेवाएं छीनीं, मनोबल तोड़ा
प्रदीप नारकर ने कहा कि केवल वेतन ही नहीं मनपा ने इन कर्मियों को ईएसआईसी, सुरक्षा संसाधन और अन्य लाभों से भी वंचित कर रखा है। ऐसे में यह मजबूर कर्मचारी दोहरी-तिहरी शिफ्ट में काम करके भी उपेक्षा और असुरक्षा के शिकार हैं। इस वजह से उनका मनोबल टूट रहा है, लेकिन जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
