अनिल मिश्रा | उल्हासनगर
राज्य में महायुती सरकार के राज में शिक्षकों को न्याय की गुहार लगाते हुए अमरण अनशन पर बैठना पड़ रहा है। उल्हासनगर स्थित सेवा सदन शिक्षण संचालक मंडल द्वारा संचालित न्यू ईरा प्रायमरी इंग्लिश स्कूल में अचानक तीन शिक्षकों को काम से हटाए जाने और विद्यालय बंद करने की अटकलों के चलते पूरे शहर में तनाव का माहौल बन गया है।
175 से अधिक प्राथमिक विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। स्कूल प्रशासन की चुप्पी और मनमानी के खिलाफ शिक्षक और अभिभावक अब खुलकर सड़कों पर उतर आए हैं। मंगलवार से शिक्षक और अभिभावक मिलकर स्कूल के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, स्कूल की जमीन बेहद महंगी और प्रमुख मार्केट क्षेत्र में स्थित है। चर्चा है कि प्रबंधन वर्ग स्कूल को बंद कर औद्योगिक संकुल या व्यावसायिक प्रोजेक्ट बनाना चाहता है — जिससे भारी आर्थिक लाभ कमाया जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, बच्चों के एडमिशन के लिए अभिभावक स्कूल का रुख कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन जानबूझकर दाखिले नहीं ले रहा, ताकि भविष्य में छात्रों की कमी दिखाकर विद्यालय को “गैर-जरूरी” बताकर बंद किया जा सके।
स्कूल से निकाली गई शिक्षिकाओं में कल्पना धनवानी (मराठी), रेश्मा पंजवानी (हिंदी व हस्तकला), और रेखा (क्लास टीचर – तीसरी कक्षा) शामिल हैं। कल्पना धनवानी ने बताया कि वे 15 वर्षों से स्कूल में सेवाएं दे रही थीं, और बिना किसी पूर्व सूचना के उन्हें काम से रोक दिया गया।
अब 175 छात्रों के सामने यह सवाल खड़ा है कि आगे उनकी पढ़ाई कैसे होगी, खासकर मराठी विषय कौन पढ़ाएगा? प्रबंधन द्वारा इस स्थिति को लेकर कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। शनिवार को बड़ी संख्या में अभिभावकों ने विद्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और शिक्षकों के समर्थन में खड़े हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्कूल बंद कर जमीन का व्यावसायिक उपयोग करना ही प्रबंधन का असली मकसद है।
इस मामले को लेकर स्थानीय भाजपा विधायक कुमार आयलानी से भी संपर्क किया गया था। उन्होंने न्याय का भरोसा दिलाया था, परंतु अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है। इससे लोगों में महायुती सरकार की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। अब राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से यह उम्मीद की जा रही है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस मामले में हस्तक्षेप कर विद्यालय बंद करने की साजिश को रोके, शिक्षकों को न्याय दिलाएं और बच्चों का भविष्य सुरक्षित करें।
इस मामले पर विद्यालय के चेयरमैन संजय डाबराई, महासचिव अविनाश राजपाल और प्राचार्य पाटील से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी ने भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
