मुख्यपृष्ठनए समाचारसम-सामयिक : लोकतंत्र को नहीं चाहिए ये वर्दी वाले गुंडे!

सम-सामयिक : लोकतंत्र को नहीं चाहिए ये वर्दी वाले गुंडे!

डॉ. अनिता राठौर

पुलिसिया मर्ज…
गुलमर्ग के हाई एल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल में तैनात सेना का एक अधिकारी (जिसके नाम व रैंक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं) आपात छुट्टी लेकर २६ जुलाई २०२५ को स्पाइसजेट की फ्लाइट एसजी ३८६ से नई दिल्ली जाने के लिए श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचा। एयरलाइन के अनुसार, उसके पास दो वैâबिन बैग थे, जिनका वजन १६ किलो था यानी ७ किलो की सीमा से दोगुने से भी अधिक। जब उससे अतिरिक्त भार का भाड़ा अदा करने के लिए कहा गया तो उसने न सिर्फ भाड़ा देने से इनकार कर दिया, बल्कि बोर्डिंग औपचारिकताएं पूरी किए बिना जबरन एरोब्रिज में प्रवेश कर गया (जो कि हवाई सुरक्षा प्रोटोकॉल्स का उल्लंघन है)। सीआईएसएफ अधिकारी ने उसे बाहर निकाला, लेकिन गेट पर वह हिंसक हो गया। उसने स्पाइसजेट के चार कर्मचारियों को लात, घूंसों व क्यू स्टैंड से बुरी तरह से पीटा। कर्मचारियों को जो चोटें आई हैं, उनमें रीढ़ की हड्डी में प्रैâक्चर, जबड़े का टूटना आदि शामिल हैं। एयरलाइन ने इसे ‘कातिलाना हमला’ बताया है। हमले का वीडियो वायरल होने के बाद सैन्य अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। श्रीनगर में डिफेंस पीआरओ ने कहा है, ‘भारतीय सेना अनुशासन व व्यवहार के उच्च मानक बरकरार रखने के लिए समर्पित है और सभी आरोपों को बहुत गंभीरता से लेती है। इस मामले की जांच करने के लिए अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग किया जा रहा है।’
इससे अलग एक घटना में कुछ दिन पहले विशाखापत्तनम से हजरत निजामुद्दीन जा रही एपी एक्सप्रेस ट्रेन के थर्ड एसी कोच में यात्रा कर रही एक महिला की आरक्षित सीट के पास एक फौजी ने नशे की हालत में पेशाब कर दिया। महिला यात्री की शिकायत पर टीटीई ने फौजी को ग्वालियर स्टेशन पर उतारकर रेलवे सुरक्षा बल के हवाले कर दिया। रेलवे अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। वर्दी का दुरुपयोग करने से संबंधित एक अन्य घटना जिला एटा, उत्तर प्रदेश की है। गांव चंद्र भानपुर से एक किशोर लड़की गायब हो गई। इस बारे में पूछताछ करने के लिए इसी गांव के १७ वर्षीय लड़का सत्यवीर सिंह को निधौली कलां पुलिस स्टेशन में बुलाया गया। जब वह थाने से गांव लौटा तो उसकी मौत हो गई, उसके गुप्तांगों सहित शरीर के अनेक हिस्सों पर चोटों के निशान थे। उसके परिवार का आरोप है कि पुलिस स्टेशन में सत्यवीर को यातनाएं दी गईं, जब उसकी हालत खराब हो गई तो उसे गांव से ५०० मी. के फासले पर छोड़ दिया गया, जहां चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। यह २ अगस्त २०२५ की घटना है। अब संबंधित थाने के दो सब इंस्पेक्टरों और तीन अन्य सिपाहियों के खिलाफ बीएनएस की धारा १०३(१) (हत्या) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
वर्दी से उम्मीदें
आजकल अखबार बहुत अधिक स्थानीय हो गए हैं कि जब तक कोई खबर राष्ट्रीय सुर्खी न बने, तब तक एक जिले की खबरों के बारे में पड़ोस के दूसरे जिले को मालूम नहीं होता है, वरना ऊपर जिस प्रकार की चंद घटनाओं का जिक्र किया गया है, उनकी संख्या इतनी अधिक है कि इनसाइक्लोपीडिया तैयार किया जा सकता है। यह सही है कि वर्दी चाहे सेना की हो या पुलिस की, हर नागरिक उसका सम्मान करता है। उस पर गर्व करता है, क्योंकि सेना अपनी जान की बाजी लगाकर देश की सीमाओं की सुरक्षा करती है और पुलिस देश के भीतर कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाती है। चूंकि ये जिम्मेदारियां बहुत महत्वपूर्ण हैं इसलिए सेना /पुलिस की ट्रेनिंग का आवश्यक हिस्सा अनुशासन व अच्छा व्यवहार है। अगर इनमें ये गुण नहीं होंगे, तो देश में अराजकता पैâलने की आशंका रहती है। कहने का अर्थ यह है कि लोकतंत्र को वर्दी वाले गुंडे नहीं चाहिए। देश इन्हें बर्दाश्त नहीं कर सकता। अनुशासनहीनता की जो यह घटनाएं अति निरंतरता के साथ सामने आ रही हैं, चिंताजनक हैं। इन पर विराम लगना चाहिए। इसलिए पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह कहा करते थे कि पुलिस की भी पुलिसिंग (अनुशासित) करने की आवश्यकता होती है।
जो लोग वर्दी में हैं, उनसे अनुशासन की उम्मीदें अधिक होती हैं, लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि वह भी इसी समाज का हिस्सा हैं, जिसका गुस्सा दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। गुस्सा बीमारी का लक्षण है। गुस्से का मुख्य कारण हाई ब्लड प्रेशर है, जिसके रोगी भारत में बहुत तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। यही वजह है कि रोड रेज (सड़क पर मारपीट) की घटनाएं निरंतरता से बढ़ती जा रही हैं। अब तो रोड रेज एयर रेज बनती जा रही है, जो अधिक खतरनाक है इसलिए हर घटना पर सख्त कार्रवाई की जाए। कॉमर्शियल हवाई जहाज आमतौर से ३६,००० फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। इतनी ऊंचाई पर गुस्से का आना अकल्पनीय परिणाम हो सकता है, जिसकी सड़क या ट्रेन में उम्मीद भी नहीं की जा सकती। फ्लाइट क्रू के दिमाग में यही बात होती है, जब वह किसी यात्री के गुस्से को शांत करने का प्रयास करते हैं।
इंडिगो मुंबई-कोलकाता फ्लाइट पर १ अगस्त २०२५ को जब एक यात्री ने दूसरे यात्री को थप्पड़ मारा था तो उस घटना को इस संदर्भ में ही समझना चाहिए। श्रीनगर एयरपोर्ट पर जो कुछ स्पाइसजेट क्रू के साथ हुआ, उससे यह चिंताजनक बात सामने आती है कि हवाईजहाज में सभी यात्री सभ्य मानसिकता के साथ यात्रा नहीं करते हैं। स्पाइसजेट की ग्राउंड क्रू पर ‘कातिलाना हमला’ इस वजह से हुआ, क्योंकि सेना के अधिकारी के वैâबिन बैग का वजन निर्धारित भार सीमा से अधिक था।
जरूरी संयम!
लेकिन फ्लाइट्स पर हिंसा भड़कने के अन्य अनेक कारण हो सकते हैं- कोई अपनी सीट को आपके घुटनों तक पीछे कर दे, अपनी पसंद का भोजन न मिलना, किसी के बच्चे का जोर-जोर से रोना, किसी का हाथ पैर पैâलाकर अंगड़ाई लेना ….इन सब बातों को संयम के साथ बर्दाश्त करना आसान नहीं होता है, लेकिन इनसे अलग भी बहुत सारी चीजें वास्तव में घातक हो सकती हैं। एक चांटा, पलटवार, अन्यों का इसमें कूदना, सबकुछ बहुत आसानी से नियंत्रण के बाहर हो सकता है और प्लेन में बैठे सभी लोग खतरे में आ सकते हैं। नि:संदेह हवाई यात्रा तनावपूर्ण होती है, लेकिन शांति भंग करने की यह वजह नहीं हो सकती। गौरतलब है कि २०२३ में जिन बदतमीज यात्रियों को नो-फ्लाई सूची में डाला गया उनकी संख्या में ७८ प्रतिशत की वृद्धि हुई और वह बढ़कर १०८ हुए। इस डाटा को इस संदर्भ में समझने की जरूरत है कि बहुत ही कम यात्री चोट पहुंचा पाते हैं। रोड रेज के अधिकतर केस रिपोर्ट नहीं होते हैं, लेकिन एयर रेज का हर मामला पुलिस में जाना चाहिए, केवल वही नहीं जो वायरल होता है या जिसमें चोट लगती है। इस सब से एक अन्य विचार यह आता है कि कुछ जगह की गुंडागर्दी बर्दाश्त करने से हर जगह गुंडागर्दी पैâल जाएगी इसलिए वर्दी में जो लोग गुंडागर्दी करते हैं, उन पर तो सबसे पहले और सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सभी को सबक मिल सके।
(लेखिका शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं)

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