-गहने बेचकर किया काम, नहीं हुआ बिल का भुगतान
-परिवार सहित पानी की टंकी पर चढ़कर आंदोलन
-लगभग एक लाख करोड़ का बिल बकाया
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में जल जीवन मिशन के तहत काम करनेवाले ठेकेदारों का भुगतान नहीं होने का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। ढाई साल से काम के भुगतान का इंतजार करते ठेकेदार सुभाष सोनवणे और सुवर्ण सिंह ठाकुर के सब्र का बांध आखिर टूट गया। वे दोनो अपने परिवार के साथ पानी की टंकी पर चढ़कर सरकार की इस व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन पर बैठ गए। उनका आरोप है कि काम पूरा हुए ढाई साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक एक रुपए का भुगतान नहीं मिला। जलगांव में आंदोलन पर बैठे ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत पानी की टंकियां और जैकवेल जैसे कार्य पूरे करने के लिए कर्ज लिया, अपनी जमा-पूंजी खर्च की और यहां तक कि पत्नियों के गहने बेचकर काम पूरा कराया। इसके बावजूद भुगतान नहीं मिलने से उनके परिवार आर्थिक संकट में आ गए हैं। आंदोलन कर रहे ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि भुगतान के अभाव में वे कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। कर्जदाता लगातार घर पहुंचकर परिवार को धमका रहे हैं। एक ठेकेदार ने दावा किया कि इस मानसिक दबाव के कारण उसका बेटा घर छोड़कर चला गया। उन्होंने एक मुख्य ठेकेदार पर भी आरोप लगाया कि ढाई साल से भुगतान रोक रखा है और पैसे मांगने पर धमकाया जाता है। विपक्ष का आरोप है कि जल जीवन मिशन की करोड़ों रुपए की परियोजनाओं में भुगतान अटकने से राज्यभर के ठेकेदार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उनका दावा है कि महाराष्ट्र में इस योजना के तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये के बिल बकाया हैं, जिससे विकास कार्यों के साथ हजारों ठेकेदारों और उनके परिवारों का भविष्य भी संकट में पड़ गया है।
