मुख्यपृष्ठसमाचारमहात्मा गांधी काशी विद्यापीठ व सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षान्त महोत्सव सम्पन्न

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ व सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का दीक्षान्त महोत्सव सम्पन्न

उमेश गुप्ता / वाराणसी

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का 47वां दीक्षांत समारोह बुधवार को रूद्राक्ष कन्वेंशन सेन्टर, सिगरा में सम्पन्न हुआ। अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम एवं मूल्यों पर स्थापित इस विश्वविद्यालय का यह 47वां दीक्षान्त समारोह है, जो गौरव की बात है। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा में डिग्री के साथ सबसे पहले कर्तव्यबोध एवं राष्ट्रबोध होना चाहिए। जीवन में परिवर्तन के लिए शिक्षा है, डिग्री के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि छात्रों को छात्रावास एवं विश्वविद्यालय प्रति अपना कर्तव्य पूर्ण करना चाहिए। हमें को स्वच्छता एवं पर्यावरण के प्रति जागरूक होना होगा, बिना जागरूकता के विकसित भारत का लक्ष्य पूर्ण नहीं होगा। पर्यावरण को हम लोगों ने बिगाड़ा है, उसे हमें ही सुधारना होगा। कुलाधिपति ने प्राकृतिक आपदाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आपदाओं से बचने के लिए हमें शोध करने की आवश्यकता है, जिससे जनहानि कम-से-कम हो।

मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. सरोज चूड़ामणि गोपाल ने कहा कि महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ का गौरवशाली इतिहास रहा है। काशी विद्यापीठ महापुरुषों की विरासत है। इस विश्वविद्यालय से कई महान विद्यार्थीगण पढ़कर निकले हैं। प्रो. सरोज ने कहा कि कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने काशी विद्यापीठ को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि टीम वर्क से ही कोई संस्था आगे बढ़ती है। गुरु तभी सफल होता है जब विद्यार्थी अच्छे आचरण से शिक्षा ग्रहण करे। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति दिव्य होती है, वह कुछ भी कर सकती है। हमें अच्छे संस्कारों के साथ कार्य करना होगा। हम सभी मिलकर कार्य करेंगे तो 2047 तक विकसित राष्ट्र ही नहीं बल्कि दुनिया के सिरमौर बनेंगे। हम पहले भी दुनिया के सिरमौर थे और अब भी बन सकते हैं।

अति विशिष्ट अतिथि योगेन्द्र उपाध्याय, कैबिनेट मंत्री, उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्यार्थियों से कहा कि मुक्त एवं प्राचीन नगरी है काशी, जहां आपने शिक्षा लिया उसके आदर्श पर आगे बढ़ें। आध्यात्मिक नगरी की गरिमा को आप छात्रों को आगे बढ़ाना है। आपको समाज में अपनी भूमिका तय करनी होगी। आपको डिग्री दिलाने में देश, सरकार और समाज का योगदान है।

विशिष्ट अतिथि रजनी तिवारी, राज्य मंत्री, उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आपकी उपाधि से राष्ट्र को विकसित करने में सहयोग करें। दीक्षान्त शिक्षा का अन्त नहीं बल्कि एक पड़ाव है, जिससे लक्ष्य के लिए आगे बढ़ना होगा।

समारोह की शुरुआत में काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद त्यागी द्वारा विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को कुलाधिपति के समक्ष रखा। उन्होंने कुलाधिपति के प्रति विश्वविद्यालय को लगातार समय देने के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया।

दीक्षांत समारोह में 101 विद्यार्थियों (छात्र- 27 एवं छात्रा-74) को कुल 103 स्वर्ण पदक प्रदान किया जायेगा, जिसमें स्नातक के 30 (07 छात्र एवं 23 छात्राएं) एवं स्नातकोत्तर के 71 (20 छात्र एवं 51 छात्राए) विद्यार्थी शामिल हैं। 02 उत्कृष्ठ खिलाड़ियों (एशियन यूनिवर्सिटी पावर लिफ्टिंग में कुमारी अमृता एवं कार्तिक) को मेडल दिया जायेगा। वहीं स्नातक के 55642 (21387 छात्र, 34252 छात्राएं एवं 03 ट्रांसजेंडर), स्नातकोत्तर के 15322 (3838 छात्र एवं 11484 छात्राए) एवं पी-एच.डी. के 178 (111 छात्र एवं 67 छात्राए) छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की जायेगी। इस तरह स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध के कुल 71,243 में 25,363 छात्र, 45,877 छात्राओं एवं 03 ट्रांसजेंडर को उपाधियां दी गई।

बुधवार को ही सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में भी 43 वां दीक्षान्त समारोह संपन्न हुआ,जिसकी अध्यक्षता करते हुये कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल ने संस्कृत एवं संस्कृति के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुये कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा भारत के सुदूर प्रान्तों में संस्कृत विद्यालयों की मान्यता देकर स्थानीय लोगों को पालि, दर्शन, बौद्धदर्शन, प्राकृत, जैनदर्शन और संस्कृत विद्या में शिक्षित एवं लाभान्वित करने का काम भी कर रहा हैं। विश्वविद्यालय द्वारा संचालित ऑन लाईन संस्कृत पाठ्यक्रम ज्ञान के वैश्विक प्रसार का माध्यम बन चुका है। यह प्रसन्नता का विषय है कि ऑन लाईन प्रशिक्षण केन्द्र के माध्यम से केवल संस्कृत भाषा का ज्ञान ही नहीं बल्कि कर्मकाण्ड, योग, मंदिर प्रबन्धन आदि की भी शिक्षा दी जा रही है। यह केवल भारत में ही नहीं बल्कि भारत के सीमा के पार अन्य देशों में भी विस्तार कर रही है। विश्वविद्यालय का यह प्रयास विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को साकार कर रहा है। संस्कृत केवल एक भाषा नहीं बल्कि ज्ञान, विज्ञान और चेतना का आधार है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि संस्कृत मात्र एक भाषा ही नहीं अपितु भारत के एक गौरवपूर्ण इतिहास को समेटने वाली अमूल्य नीधि है जो समस्त भारतीयों के लिये उर्जा का स्रोत है। संस्कृत के ज्ञान के बिना भारत को जानना पूर्ण सम्भव नहीं है।
इस अवसर पर कुलाधिपति के द्वारा 36 मेधावियों को विभिन्न प्रकार 58 मेडल (पदक) देकर सम्मानित किया गया।
दीक्षान्त समारोह में 11477 उपाधियों प्रदान की गयी। कार्यकम का प्रारम्भ पौराणिक एवं वैदिक मंगलाचरण से किया गया।

दीक्षान्त समारोह के प्रारम्भ में शोभायात्रा/शिष्ट यात्रा का दीक्षान्त स्थल पर परम्परानुसार हुआ।

इस अवसर केन्द्रीय उच्च तिब्बतीय संस्थान, सारनाथ के कुलपति प्रो० वड्चुझ दोर्ज नेगी, पूर्व कुलपति प्रो. पृथ्वीश नाग मेयर अशोक कुमार तिवारी, प‌द्मभूषण प्रो० देवीप्रसाद द्विवेदी, प्रो. रामपूजन पाण्डेय, प्रो० जितेन्द्र कुमार, प्रो० रजनीश कुमार शुक्ल, प्रो. महेन्द्र पाण्डेय, प्रो० राजनाथ, प्रो० शम्भूनाथ शुक्ल, प्रो० विधु द्विवेदी, प्रो० नीलम गुप्ता, प्रो० दिनेश कुमार गर्ग सहित विश्ववि‌द्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी सहित छात्र एवं छात्रायें उपस्थित थे।

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