एड. कनई बिस्वास
-सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक को भगोड़ा बनने के लिए दुष्प्रेरित करना, भगोड़े सैनिक को शरण देना तथा व्यापारी पोत के कप्तान की लापरवाही से भगोड़े सैनिक का जहाज पर छिपा रहना
धारा १६३, १६४ और १६५
भाग:५५
भारतीय न्याय संहिता, २०२३ सशस्त्र बलों में अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को सर्वोच्च महत्व देती है। यदि कोई व्यक्ति किसी सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक को अपनी ड्यूटी छोड़कर भगोड़ा बनने के लिए उकसाता है, ऐसे भगोड़े सैनिक को जानबूझकर शरण देता है या किसी व्यापारी पोत (मर्चेंट वेसल) का कप्तान अपनी लापरवाही से ऐसे भगोड़े सैनिक को जहाज पर छिपे रहने देता है तो यह दंडनीय अपराध है। धारा १६३, १६४ और १६५ इन्हीं प्रावधानों को स्पष्ट करती हैं।
केस स्टडी – १: ‘सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक को भगोड़ा बनने के लिए दुष्प्रेरित करना’ (धारा १६३)
एक व्यक्ति ने सेना के एक जवान को लगातार समझाया कि वह अपनी ड्यूटी छोड़कर भाग जाए। उसने उसे नौकरी छोड़ने पर आर्थिक सहायता देने का भी आश्वासन दिया। कुछ समय बाद जवान अपनी यूनिट छोड़कर फरार हो गया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी ने सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक को भगोड़ा बनने के लिए उकसाया था? क्या आरोपी के दुष्प्रेरण और सैनिक के फरार होने के बीच संबंध है? क्या उपलब्ध साक्ष्य आरोपी की भूमिका सिद्ध करते हैं?
फैसला- यदि यह साबित हो जाता है कि आरोपी ने सैनिक को भगोड़ा बनने के लिए दुष्प्रेरित किया तो उसके विरुद्ध धारा १६३ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १६३ का उद्देश्य सशस्त्र बलों में अनुशासन बनाए रखना है। किसी सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक को अपनी ड्यूटी छोड़कर फरार होने के लिए उकसाना गंभीर अपराध है।
केस स्टडी- २: ‘भगोड़े सैनिक को शरण देना’ (धारा १६४)
एक व्यक्ति को पता था कि उसका रिश्तेदार सेना से फरार होकर आया है। इसके बावजूद उसने उसे कई दिनों तक अपने घर में छिपाकर रखा और पुलिस या सैन्य अधिकारियों को इसकी सूचना नहीं दी।
अदालत क्या देखेगी?
क्या संबंधित व्यक्ति सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक था और भगोड़ा घोषित था? क्या आरोपी को उसके भगोड़ा होने की जानकारी थी? क्या आरोपी ने जानबूझकर उसे शरण या सहायता दी?
फैसला- यदि यह साबित हो जाता है कि आरोपी ने जानते हुए भगोड़े सैनिक को शरण दी तो उसके विरुद्ध धारा १६४ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १६४ के अनुसार, किसी भगोड़े सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक को जानबूझकर शरण देना या छिपाना अपराध है।
केस स्टडी – ३: ‘व्यापारी पोत के कप्तान की लापरवाही से भगोड़े सैनिक का जहाज पर छिपा रहना’ (धारा १६५)
अदालत क्या देखेगी?
क्या जहाज पर भगोड़ा सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक छिपा हुआ था? क्या कप्तान ने आवश्यक सावधानी बरतने में लापरवाही की? क्या उसी लापरवाही के कारण भगोड़ा व्यक्ति जहाज पर छिपा रह सका?
फैसला- यदि यह साबित हो जाता है कि कप्तान की लापरवाही के कारण भगोड़ा सैनिक जहाज पर छिपा रहा, तो उसके विरुद्ध धारा १६५ के तहत कार्रवाई की जाएगी। समझें: धारा १६५ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापारी पोतों के कप्तान अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का पालन करें। भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि सशस्त्र बलों का अनुशासन केवल सैनिकों की ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी है। सैनिक को भगोड़ा बनने के लिए उकसाना, भगोड़े सैनिक को शरण देना या लापरवाही के कारण उसे छिपे रहने देना- ये सभी राष्ट्रहित के विरुद्ध गंभीर अपराध हैं इसलिए कानून ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान करता है।
(अगले अंक में: धारा १६६, १६७ और १६८ – ‘सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक को आदेश की अवज्ञा के लिए दुष्प्रेरित करना, विशेष अधिनियमों के अधीन आने वाले व्यक्ति तथा सैनिक, नौसैनिक या वायु सैनिक की वर्दी या पहचान का अनधिकृत उपयोग’ को आसान उदाहरणों के साथ समझेंगे।)
