भाग:७१
-एड. कनई बिस्वास
भारतीय न्याय संहिता, २०२३ यह सुनिश्चित करती है कि सरकारी कार्यवाही, जांच और न्यायिक प्रक्रिया सत्य एवं विश्वसनीय जानकारी के आधार पर संचालित हो। यदि कोई व्यक्ति, जो कानून के अनुसार सूचना देने के लिए बाध्य है, सूचना नहीं देता, जानबूझकर झूठी सूचना देता है या लोक सेवक के समक्ष विधिपूर्वक अपेक्षित शपथ या प्रतिज्ञान करने से इनकार करता है, तो वह कानून का उल्लंघन करता है। धारा २११, २१२ और २१३ ऐसे ही अपराधों का प्रावधान करती हैं।
केस स्टडी – १: ‘लोक सेवक को विधिक रूप से दी जाने वाली सूचना न देना’ (धारा २११)
एक फैक्टरी के प्रबंधक को कानून के अनुसार एक गंभीर औद्योगिक दुर्घटना की सूचना संबंधित सरकारी विभाग को तत्काल देनी थी। दुर्घटना होने के बावजूद उसने यह सूचना जानबूझकर छिपा ली, जिससे जांच और राहत कार्य में देरी हुई।
क्या सूचना न देने से सरकारी कार्य या जांच प्रभावित हुई?
फैसला – यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने विधिक दायित्व होने के बावजूद लोक सेवक को आवश्यक सूचना नहीं दी, तो उसके विरुद्ध धारा २११ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समझें: धारा २११ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन व्यक्तियों पर कानून द्वारा सूचना देने का दायित्व डाला गया है, वे समय पर और सही सूचना उपलब्ध कराएँ।
केस स्टडी – २: ‘झूठी सूचना देना’ (धारा २१२)
एक व्यक्ति ने पुलिस को शिकायत दी कि उसके पड़ोसी ने चोरी की है। जांच में पता चला कि शिकायत पूरी तरह झूठी थी और उसका उद्देश्य पड़ोसी को परेशान करना था।
फैसला – यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने जानबूझकर झूठी सूचना दी, तो उसके विरुद्ध धारा २१२ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समझें: धारा २१२ का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को गुमराह होने से बचाना है। झूठी सूचना देकर किसी व्यक्ति को फंसाने या सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कराना कानूनन अपराध है।
केस स्टडी – ३: ‘शपथ या प्रतिज्ञान करने से इनकार करना’ (धारा २१३)
एक जांच अधिकारी ने एक गवाह को कानून के अनुसार शपथ या प्रतिज्ञान लेकर बयान देने के लिए कहा। गवाह बिना किसी वैध कारण के शपथ या प्रतिज्ञान करने से इनकार करता रहा, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई।
फैसला – यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने विधिपूर्वक अपेक्षित शपथ या प्रतिज्ञान करने से बिना वैध कारण इनकार किया, तो उसके विरुद्ध धारा २१३ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समझें: धारा २१३ का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी और न्यायिक कार्यवाही में दिए जाने वाले बयान शपथ या प्रतिज्ञान के साथ दर्ज हों, जिससे उनकी विश्वसनीयता बनी रहे।
(अगले अंक में: धारा २१४, २१५ और २१६ – लोक सेवक द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देने से इनकार करना, कथन पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना तथा लोक सेवक या शपथ दिलाने के लिए अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान पर झूठा बयान देने से संबंधित अपराधों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे।)
