-सुप्रिया सुले ने सरकार से पूछा– ९२ लाख या ८२ लाख
-अपात्रों को गए हजारों करोड़ पर श्वेतपत्र और निष्पक्ष जांच की मांग
सामना संवाददाता / मुंबई
मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहन योजना में लाभार्थियों की पात्रता और सरकारी धन के वितरण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने सूचना के अधिकार से सामने आए आंकड़ों का हवाला देते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि योजना के तहत आवेदन लेने से लेकर लाभार्थियों की छंटनी और सत्यापन तक पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित की गई।
आरटीआई के आधार पर सामने आई जानकारी के अनुसार, जून २०२६ तक करीब ९२ लाख अपात्र लाभार्थियों को ९,६०५ करोड़ रुपए का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। इनमें करीब ६२ लाख ऐसे लाभार्थी बताए गए हैं, जिन्होंने ई-केवाईसी पूरी नहीं की थी, जबकि अन्य मामलों में आय सीमा, उम्र, सरकारी नौकरी और दूसरी योजनाओं से लाभ लेने जैसी वजहें बताई गई हैं।
यहीं से आंकड़ों का विवाद और गहरा गया है। सरकार की ओर से पहले करीब ८० लाख लाभार्थियों को हटाए जाने की जानकारी दी गई थी, जबकि बाद में सरकारी रिकॉर्ड की रिपोर्टिंग में ९२ लाख से अधिक नाम हटाए जाने की बात सामने आई। सुप्रिया सुले ने इसी अंतर पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर सही संख्या क्या है और अलग-अलग आंकड़े सामने आने की वजह क्या है? सुले ने सवाल उठाया कि जब आधार, आयकर और अन्य सरकारी डेटाबेस के जरिए पात्रता की जांच की जा सकती थी।
९,६०५ करोड़ पर उठे सवाल
आरटीआई में सामने आई ९,६०५ करोड़ रुपए की राशि और सरकार द्वारा पहले बताए गए अलग-अलग आंकड़ों के बीच अंतर ने योजना की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लाभार्थियों के सत्यापन के साथ सरकारी धन के वितरण की पारदर्शिता भी जांच के दायरे में है।
