-जोगेश्वरी–गोरेगांव के दो पुलों पर फिर ४६ करोड़ रुपए खर्च की तैयारी
-वाल-पहले की मरम्मत कितने साल चली?
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में पुलों और सड़कों की मरम्मत पर हर साल करोड़ों रुपए खर्च होते हैं, लेकिन कुछ ही वर्षों में फिर वही संरचनाएं भारी मरम्मत की सूची में पहुंच जाती हैं। अब बीएमसी ने जोगेश्वरी रोड ओवरब्रिज और गोरेगांव के एमटीएनएल फ्लाईओवर की मरम्मत तथा ध्वनि-अवरोधक लगाने के लिए करीब ४६.०५ करोड़ रुपए का टेंडर निकाला है। टेंडर में बेयरिंग, एक्सपेंशन जॉइंट, गर्डर, स्टील स्ट्रक्चर, पियर, पैरापेट और अन्य संरचनात्मक हिस्सों की मरम्मत शामिल है। यानी खर्च मामूली पैचवर्क पर नहीं, बड़े तकनीकी काम पर प्रस्तावित है।
यहीं सबसे बड़ा सवाल उठता है कि इन पुलों की पिछली बड़ी मरम्मत कब हुई थी, उस पर कितना पैसा खर्च हुआ था और उसकी घोषित आयु कितनी थी? यदि कुछ वर्षों में ही दोबारा करोड़ों की मरम्मत जरूरी हो रही है तो जनता को यह जानने का अधिकार है कि समस्या डिजाइन में है, निर्माण गुणवत्ता में, रखरखाव में या समय पर निरीक्षण न होने में। बीएमसी को टेंडर के साथ पिछले पांच-दस साल का मरम्मत इतिहास, खर्च और स्ट्रक्चरल ऑडिट रिपोर्ट भी सार्वजनिक करनी चाहिए।
सिर्फ नया टेंडर नहीं, पुराना हिसाब भी दो!
४६ करोड़ रुपए का नया खर्च प्रस्तावित करना आसान है, लेकिन असली जवाबदेही तब होगी जब बीएमसी बताए कि इन दोनों पुलों पर पहले कितनी बार मरम्मत हुई, किन ठेकेदारों ने काम किया और वह काम कितने समय तक टिकना था। बार-बार करोड़ों खर्च होने पर सवाल उठना स्वाभाविक है कि मुंबई को मरम्मत चाहिए या टिकाऊ निर्माण?
