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मेट्रो के फेरे बढ़े, लोकल क्यों अड़ी!..जब भीड़ का पता था तो अतिरिक्त लोकल क्यों नहीं?

संदीप पांडेय / मुंबई
मुंबई में गणेशोत्सव पूरे उत्साह से चल रहा है। लालबाग और चिंचपोकली में रातभर बाप्पा के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। रेलवे को भी इस भीड़ का अंदाजा पहले से था। कोंकण जाने वाले यात्रियों के लिए सैकड़ों स्पेशल ट्रेनें, स्टेशनों पर अतिरिक्त सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की गई। लेकिन रातभर दर्शन करने वाले मुंबईकरों को घर पहुंचाने के लिए अतिरिक्त लोकल की मांग पर रेलवे ने क्या किया? यात्रियों का आरोप है कि इस जरूरत को नजरअंदाज किया गया।
भोर में पहली लोकल का इंतजार
गणेशोत्सव के दौरान भोर में करी रोड स्टेशन पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहली लोकल का इंतजार करते दिखाई दे रहे हैं। लालबाग से दर्शन करके लौटे यात्रियों की आंखों में नींद और चेहरे पर थकान थी, लेकिन घर पहुंचने के लिए ट्रेन का इंतजार करना उनकी मजबूरी बनी रही। यात्रियों का सवाल है कि जब रेलवे को पता था कि लालबाग में दर्शन रात देर तक चलेंगे और हजारों भक्त भोर में स्टेशन पहुंचेंगे, तो इन यात्रियों के लिए कुछ विशेष लोकल चलाने की योजना क्यों नहीं बनाई गई?
मेट्रो ने बढ़ाए फेरे, लोकल क्यों नहीं?
गणेशोत्सव के दौरान मुंबई मेट्रो ने यात्रियों की बढ़ी आवाजाही को देखते हुए कई मार्गों पर सेवा बढ़ाई है। लाइन २ए, २बी ७ और ९ पर १० से १५ अतिरिक्त फेरे चलाए जा रहे हैं और सेवाओं का समय रात १२:३० बजे तक बढ़ाया गया है।
स्पेशल ट्रेनें हैं, फिर लोकल की कमी क्यों?
गणेशोत्सव के लिए रेलवे ने मुंबई से कोंकण जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी संख्या में स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए भी अतिरिक्त बंदोबस्त किया गया है, लेकिन यात्रियों का सवाल है कि गणपति स्पेशल ट्रेनों की योजना बनाते समय मुंबई के भीतर दर्शन करने और वापस लौटने वाले यात्रियों की जरूरत को अलग से क्यों नहीं देखा गया? यात्रियों के मुताबिक, यह सिर्फ सुविधा का सवाल नहीं है। रातभर दर्शन के बाद हजारों लोगों का एक साथ स्टेशन पर पहुंचना भीड़ प्रबंधन और सुरक्षित निकासी की चुनौती भी पैदा करता है।
गणपति भक्तों को भोर तक इंतजार

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