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दिल्ली होटल अग्निकांड एवं मुजफ्फरपुर अस्पताल हादसा अत्यंत दुखद, झारखंड में सभी होटल, अस्पताल एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की फायर सेफ्टी जांच कराई जाए: विजय शंकर नायक

अनिल मिश्र / रांची

बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मृत्यु तथा गुरुवार को बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में आग लगने से पांच मरीजों की दर्दनाक मौत की घटना अत्यंत दुखद, हृदयविदारक और चिंताजनक है। इन घटनाओं में अनेक परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई है।
झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली के होटल में फायर सेफ्टी संबंधी गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं तथा होटल के पास आवश्यक अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण-पत्र (फायर एनओसी) नहीं होने की बात भी प्रकाश में आई है। यह दर्शाता है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस प्रकार निर्दोष लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी राज्य सरकार, नगर विकास विभाग, अग्निशमन विभाग तथा जिला प्रशासन से मांग करती है कि राज्य के सभी होटल, लॉज, गेस्ट हाउस, अस्पताल, नर्सिंग होम, मॉल, बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों, कोचिंग संस्थानों एवं अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों की फायर सेफ्टी व्यवस्था और फायर एनओसी की विशेष जांच कराई जाए।
उन्होंने आगे कहा कि जिन संस्थानों के पास वैध फायर एनओसी नहीं है अथवा जहां अग्नि सुरक्षा उपकरण केवल कागजों तक सीमित हैं, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। केवल कागजी औपचारिकताओं से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती, बल्कि नियमित निरीक्षण, मॉक ड्रिल, आपातकालीन निकासी व्यवस्था तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन भी आवश्यक है।
विजय शंकर नायक ने कहा कि झारखंड तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं। यदि आज सतर्कता नहीं बरती गई, तो भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि जनहित में तत्काल राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाकर सभी संबंधित संस्थानों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाए तथा उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि झारखंड की जनता स्वयं को सुरक्षित महसूस कर सके।

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