धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
राज्य में २९ मनपाओं के चुनावी नतीजे कल देर रात तक स्पष्ट नहीं हो पाए थे, लेकिन ज्यादातर सीटों के नतीजे सामने आ चुके थे। मुंबई में शिवसेना काफी मजबूत स्थिति में नजर आई। इस वर्ष के मनपा चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सत्ता का जोर, पैसा, प्रशासनिक दबाव और सियासी हथकंडे भी ब्रांड ठाकरे को रोक नहीं सकते। भाजपा और महायुति ने इस चुनाव में साम-दाम-दंड-भेद की पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन इसके बावजूद मुंबई की जनता ने साफ संदेश दे दिया कि आज भी उनके दिलों पर ठाकरे ही राज करते हैं और ‘ब्रांड ठाकरे’ जिंदाबाद है!
इस मनपा चुनाव में ठाकरे ब्रांड को कमजोर करने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया। कहीं खुलेआम पैसों का इस्तेमाल हुआ तो कहीं वोटिंग मशीनों में गड़बड़ी के आरोप लगे। बिना पूर्व सूचना के नए नियम लागू किए गए, मतदाता सूची में फर्जी नाम जोड़े गए।
शिवसेना ठाकरे की ही!
जनता ने लगाई मुहर
मुंबई के इस पैâसले ने यह भी जता दिया कि चुनाव सिर्फ पैसे और प्रबंधन से नहीं जीते जाते। जमीन से जुड़ाव, स्थानीय विश्वास और भावनात्मक रिश्ता आज भी सबसे बड़ा पैâक्टर है। तमाम हथकंडों के बाद भी भाजपा महायुति ठाकरे ब्रांड को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही। इसी के साथ मनपा चुनाव ने एक बार फिर इतिहास दोहरा दिया है।
चुनावी समीकरण बदलने के लिए फेक आधार कार्ड बनाकर फर्जी मतदान करवाए गए!
महायुति ने मुंबई मनपा पर कब्जे के लिए साम-दाम-दंड-भेद हर तरह के हथकंडे अपनाए। आरोप है इसके लिए बड़ी संख्या में अन्य राज्यों यहां तक कि बांग्लादेश से फर्जी मतदाता लाए गए। इन फर्जी मतदाताओं को मुंबई की वोटर लिस्ट में शामिल नामों के फर्जी आधार कार्ड बनाकर वोट करवाए गए, ताकि चुनावी समीकरण बदले जा सकें।
इतना ही नहीं, सत्ता के दबाव में प्रशासनिक मशीनरी का भी खुलकर इस्तेमाल किया गया। विपक्षी उम्मीदवारों को डराने, धमकाने और तोड़ने की कोशिशें हुर्इं। बावजूद इसके, मुंबईकर नहीं झुके। दादर से लेकर कई महत्वपूर्ण वार्डों में जनता ने ब्रांड ठाकरे के पक्ष में वोट देकर साफ कर दिया कि मुंबई की नसों में आज भी ब्रांड ठाकरे और शिवसेना ही दौड़ती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह चुनाव सिर्फ पार्षदों का नहीं था, बल्कि ठाकरे बंधु बनाम सत्ता की लड़ाई थी। और इस लड़ाई में जनता ने सत्ता की ताकत को नहीं, बल्कि अपने भरोसे और पहचान ‘ब्रांड ठाकरे’ को चुना और इसके साथ ही बता दिया कि शिवसेना ठाकरे की ही है और ‘ब्रांड ठाकरे जिंदाबाद’ है!
