मुख्यपृष्ठग्लैमरधड़क 2: रोमांस के नाम पर समाजशास्त्र की क्लास

धड़क 2: रोमांस के नाम पर समाजशास्त्र की क्लास

हिमांशु राज़

अगर आपने ‘धड़क 2’ देखने का फैसला किया है, तो सबसे पहले एक बात साफ़ कर लें: आपने फिल्म नहीं, एक “सामाजिक शोध प्रबंध” पिक किया है, जिसे गलती से थिएटर में रिलीज़ कर दिया गया है। और अगर आप सोच रहे थे कि ये ‘धड़क’ जैसा रोमांटिक रोलरकोस्टर होगा — तो माफ़ कीजिए, यहां इमोशन के रोलरकोस्टर की जगह रेशन कार्ड की लाइन जैसी धीमी, थकाऊ और सरकारी फॉर्म वाली कहानी मिलेगी। फिल्म की शुरुआत होती है एक गरीब दलित लड़के और उच्च जाति की लड़की की मुलाक़ात से — यानी वही फार्मूला जो आपने पिछले 200 बार देख ही लिया होगा, बस इस बार उसे इतना “रीअलिस्टिक” बना दिया गया है कि प्रेम कहानी ढूंढने के लिए माइक्रोस्कोप चाहिए। सिद्धांत चतुर्वेदी ऐसे लगते हैं जैसे क्लासिकल साहित्य के स्टूडेंट हों जिन्हें जबरदस्ती कानून पढ़ने भेज दिया गया हो। और तृप्ति डिमरी? वो जिस भी सीन में हैं, उनकी आंखों में सिर्फ़ एक ही सवाल जलता है — “क्या मेरा किरदार आज रोएगा, बोलेगा या फिर बस कैमरे में परेशान रहेगा?” निर्देशन की बात करें तो निर्देशक शाज़िया इक़बाल ने इस फिल्म को ऐसे ट्रीट किया जैसे हर फ्रेम में ऑस्कर छुपा हो। इतना गहराई से डूबती है फिल्म की गति, कि कुछ सीन देखकर दर्शकों को लगता है जैसे नेटफ्लिक्स का बफ़रिंग सर्कल आ गया हो। संवाद ऐसे भारी, कि अगर ज़रा सी भी हँसी आ गई — समझ लो तुमने फिल्म की आत्मा का अपमान कर दिया। संगीत की बात तो ऐसी है कि “बस एक धड़क” वाक़ई बस एक ही बार सुन पाने लायक बन पाया है। कहीं और सुन लिया तो आप ख़ुद ‘धड़क’ नहीं, अपनी धौंकनी संभालने लगेंगे। फिल्म सामाजिक चेतना फैलाने आई थी, पर दर्शकों ने चेतावनी को ही ट्रेलर समझकर अनदेखा कर दिया। 14.35 करोड़ की कमाई से साफ़ है कि जनता ने न सिर्फ फिल्म को बल्कि उस पेटीएम प्रमोशन को भी इग्नोर कर दिया, जिसमें कहा गया था “देखो प्रेम,जाती के बंधनों को कैसे तोड़ता है” — लेकिन पर्दे पर तो प्यार ही आईसीयू में पड़ा है!धड़क 2 को देखकर आप प्रेम में नहीं, विचारधारा में डूबेंगे। और इतना डूबेंगे कि जब फिल्म खत्म होगी, तो बाहर आकर आपको लगेगा जैसे आपने बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी से डिस्टेंस लर्निंग में समाजशास्त्र में एम ए कर लिया कर लिया हो — बिना एडमिशन, बिना एग्जाम! हों सके तो चेतावनी ही समझें,फ़िल्म देखने से पहले पॉपकॉर्न के साथ-साथ पेन और नोटबुक जरूर ले जाएं, क्योंकि क्लास टेस्ट कभी भी ले सकते हैं।

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