• सिंचाई विभाग डकार गया ड्रेन सफाई के लाखों रुपए
•सुलतानपुर – प्रतापगढ़ के सैकडों किसान प्रभावित
सामना संवाददाता/सुल्तानपुर
यूपी के अवध क्षेत्र में सुल्तानपुर-प्रतापगढ़ जिलों की सरहद पर स्थित आठ गांवों में रोपी गई धान की फसल सिंचाई विभाग के अफसरों के भ्रष्टाचार के कारण जलमग्न होकर बर्बाद होने के कगार पर है। वजह क्षेत्र से गुजरी ड्रेन की सफाई कराने के बजाय प्रतिवर्ष इस बाबत प्राप्त सरकारी बजट को डकार जाता है। इन आठ गांव में हर साल बरसात कहर बनकर आती है। दोनों जिलों के सैकड़ों किसान की फसल खसड़े ड्रेन की सफाई नहीं होने से बर्बाद हो रही है। दो-दो बार धान की पौध लगा चुके किसानों की फसल फिर से डूब गई है। फसल चौपट होने की वजह से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। दोनों जिलों की ५०० बीघा फसल फिर से फसल जलमग्न हो गई है। दरअसल, प्रतापगढ़ जिले के सिकरी क़ानूपुर से खसड़े ड्रेन निकली है। बरसाती पानी खेतों की फसल को नुकसान पहुँचा सके, इसके लिए बनाई गई यह ड्रेन प्रतापगढ़ के बरहा, पूरे निरंजन, डोमनपुर, नौतेरवा होते हुए सुलतानपुर जिले के रंघईपुर (सूर्यभानपट्टी), खसड़े, पुरवा होते हुए मलाकदोषपट्टी में मौजूद पीली में मिल जाती है। किसानों के मुताबिक बीते तीन वर्षों से इस ड्रेन की सफाई नहीं होती है। करीब सात किमी लंबी ड्रेन पर बने आवाजाही वाले के दोनों तरफ थोड़ी – थोड़ी दूर जेसीबी से सफाई करके सिर्फ खानापूरी की जाती है। इससे इस ड्रेन से खेतों में भरा पानी कई दिन बाद भी निकल नहीं पाता है। ज्यादा दिन पानी भरे रहने की वजह से फसल सड़ जाती है। जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। दो जिलों की सीमा पर मौजूद गांव के किसान इससे बेहद परेशान हैं। खेत में पानी भर जाने की वजह से फसलों में खाद व दवा का भी छिड़काव नहीं हो पा रहा है। तहसील के खसड़े गांव में राजेश कुमार सिंह की तीन बीघा,जवाहरलाल सिंह की दो बीघा, रमेश कुमार सिंह की डेढ़ बीघा, सुभाष सिंह की डेढ़ बीघा, श्यामलाल सिंह की डेढ़ बीघा, शंकर पाल की डेढ़ बीघा समेत काफी संख्या में किसानों की फसल चौपट हो गई है। इसके अलावा रँघईपुर , मलाकदोषपट्टी के भी किसान प्रभावित हैं। इसी तरह प्रतापगढ़ जिले के भी गांव पूरे निरंजन, डोमनपुर, नौतेरवा के भी काफी किसान की फसल जलमग्न हो गई है।
दो बार लगाई थी फसल, सड़ गई
डोमनपुर (प्रतापगढ़) निवासी ओम प्रकाश सरोज का दो बीघा खेत खसड़े गांव में है। पहली बरसात में धान की पौध सड़ गई तो दोबारा लगाई गई। अब फिर से धान की पौध बचने के आसार नहीं दिख रहे हैं। हरिश्चंद्र की भी एक बीघा फसल खसड़े गांव में जलमग्न हो गई है। गरये निवासी शिव प्रसाद यादव का पांच बीघा खेत डोमनपुर (प्रतापगढ़) में है। फसल में कीड़े लगे हुए हैं। दवा डालनी जरूरी है। पर, खेत जलमग्न होने की वजह से खाद व दवा डालने का असर नहीं होगा। दुर्गेश सरोज की भी दो बीघा खेत डोमनपुर (प्रतापगढ़) में है। उनकी भी फसल हर बरसात में बर्बाद हो जाती है।
एक्सईएन ने पल्ला झाड़ा
सिंचाई विभाग के एक्सईएन विजय सिंह कहते हैं कि ‘खसड़े ड्रेन नाम से कोई ड्रेन मेरे कार्यक्षेत्र में नहीं है। प्रतापगढ़ के गांव से निकली है तो उस जिले के कार्यक्षेत्र में ही होगी। आप प्रतापगढ़ से पता कर लीजिए।’
