द्रुप्ति झा / मुंबई
मुंबई में विभिन्न आकार और क्षमताओं के कुल ४६ सूखा कचरा के पृथक्करण केंद्र हैं, जो २४ वार्डों में पैâले हैं। इन केंद्रों में शहर भर के घरों से इकट्ठा किए गए सूखे कचरे को इकट्ठा करके उसमें छंटनी की जाती है। लेकिन अभी भी शहर में सूखा कचरा पृथक्करण केंद्र पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे हैं, इसलिए सूखा कचरा केंद्रों का आधुनिकीकरण के लिए मनपा मुंबई के ४१ सूखा कचरा केंद्रों में से १० का नवीनीकरण करने जा रही है। नगर निकाय ने आधुनिकीकरण योजना के पहले चरण के लिए कम से कम २,००० वर्ग फुट में पैâले केंद्रों को चिह्नित किया है, जिसके लिए आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) ने प्रत्येक केंद्र के लिए ७० लाख रुपए का कोष आवंटित किया है।
हिंदुस्थान में प्रति वर्ष लगभग १५ मिलियन टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है और इसमें से लगभग ६० प्रतिशत का पुनर्चक्रण किया जाता है, जबकि बाकी को बिना एकत्र किए या कूड़े के रूप में छोड़ दिया जाता है। आर्थिक विकास और शहरीकरण की अभूतपूर्व दर के चलते, भारत में १९७० और २०१५ के बीच वार्षिक सामग्री खपत में छह गुना वृद्धि देखी गई, जो १.१८ अरब टन से बढ़कर ७ अरब टन हो गई है। २०३० तक यह संख्या दोगुनी होकर लगभग १४.२ अरब टन होने की उम्मीद है। अतिरिक्त नगर आयुक्त (शहर) अश्विनी जोशी ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य कांजुरमार्ग और देवनार के डंपिंग ग्राउंड पर बोझ कम करना भी है, जहां शहर का कचरा बिना उपचारित किए फेंक दिया जाता है। पहले चरण में बीएमसी वडाला, मरोल, दहिसर (पूर्व) और बोरीवली (प.) स्थित सूखा कचरा पृथक्करण केंद्रों का आधुनिकीकरण करेगी, जिनमें से सबसे बड़ा केंद्र दहिसर में १४,२०० वर्ग फुट भूमि में पैâला है। इस बीच कोलाबा, कुंभारवाड़ा, अग्रीपाड़ा और अंधेरी (प.) स्थित केंद्रों का आधुनिकीकरण दूसरे चरण में किया जाएगा और तीसरे चरण में अंधेरी, घाटकोपर और ओशिवरा सहित चार और केंद्रों का उन्नयन किया जाएगा।
