-मिले रु. २१४.२६ करोड़
-खर्च सिर्फ रु. १६.४६ करोड़
धीरेंद्र उपाध्याय / मुंबई
राज्य की सत्तारूढ़ महायुति के तीन घटकों के बीच आपसी घमासान चल रहा है। लोकलुभावन योजनाओं के चलते सरकार की तिजोरी खाली है। जो थोड़े-बहुत पैसे हैं भी, उनकी बंदरबांट चल रही है। सरकार में नियोजन का अभाव है और जिसे जहां मिल रहा है, वह वहीं लूट मचाए हुए है। इस क्रम में मुंबई और राज्य का विकास ‘आईसीयू’ में पहुंच चुका है।
महायुति में शामिल तीनों घटक दलों की लगातार खींचतान के कारण ही मुंबई का विकास आईसीयू में पहुंचा है। यह इसी बात से समझा जा सकता है कि जिला नियोजन के विकास के तहत मुंबई के लिए बजट में ५२८ करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। मगर सरकार ने फंड का रोना रोते हुए सिर्फ २१४.२६ करोड़ रुपए ही जारी किए। इसमें भी आपसी खींचतान के चलते सिर्फ १६.४६ करोड़ रुपए ही खर्च किए गए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुंबई के ‘विकास’ की हालत कितनी दयनीय है।
कैसे होगा राज्य का विकास?
बजट का १६.८% ही फंड हुआ जारी!
‘महायुति’ का हाल बेहाल
महाराष्ट्र में जिला नियोजन के लिए सरकार ने २० हजार करोड़ का भारी-भरकम बजट बनाया था। मगर खाली खजाने का बहाना बनाकर सरकार ने इसमें से सिर्फ १६.८ फीसदी फंड ही जारी किया। यह राशि करीब ३,३५३ करोड़ रुपए है। भ्रष्टाचार और लालफीताशाही के कारण हालात इतने बदतर हैं कि इसमें भी खर्च महज २,३२५ करोड़ हुआ है। यही कारण है कि पुणे और गढ़चिरौली जैसे जिले थोड़ी प्रगति दिखा पाए, जबकि मुंबई और रत्नागिरी सबसे फिसड्डी साबित हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि बाढ़, अतिवृष्टि और ‘लाडली बहन’ योजना को निधि देना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष २०२५-२६ के लिए राज्य सरकार ने जिला नियोजन समिति के लिए २०,१६५ करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया है। आवंटित निधि में से अक्टूबर अंत तक ३,३५३ करोड़ रुपए की निधि वितरित की गई है, जिसमें से केवल २,३२५ करोड़ रुपए की निधि ही खर्च हो पाई है। वित्त व नियोजन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिलावार प्राप्त निधि में से केवल १० से १५ प्रतिशत खर्च की गई है। निधि खर्च में पुणे, गढ़चिरौली, अकोला, अमरावती और सोलापुर जिले सबसे आगे हैं। सबसे कम निधि खर्च करने वाले जिलों में भंडारा, मुंबई शहर, रत्नागिरी, सातारा और जालना शामिल हैं। इसी के साथ ही अन्य जिलों में निधि खर्च का प्रतिशत ५ से १५ प्रतिशत के बीच है।
बाढ़ से नुकसान
राज्य में चुनाव से पहले ‘लाडली बहन’ योजना शुरू हुई। चुनाव के बाद हुई अतिवृष्टि और बाढ़ का राज्य पर बड़ा फटका बैठा। इस नुकसान की भरपाई के लिए मदद देने में सरकार की तिजोरी खाली हो गई। कुछ जिलों में किसानों को और बाढ़ से घरों को हुए नुकसान की तात्कालिक मदद के तौर पर नियोजन समिति से निधि खर्च की अनुमति दी गई थी।
आचार संहिता का बहाना
निर्वाचन आयोग द्वारा राज्य में मनपा और जिला परिषद चुनावों की तैयारी शुरू है। इससे कभी भी आचार संहिता लागू होने की संभावना है। इस कारण मनपा और जिला परिषदों द्वारा कार्यों की सूचियां मांगने का काम शुरू है। ज्यादा से ज्यादा कार्यों को निधि देने का प्रयास हो रहा है, लेकिन वास्तव में सरकार की ओर से निधि उपलब्ध होगी भी या नहीं? इस बारे में अधिकारी स्तर पर कोई जवाब नहीं मिल रहा।
फाइलें वेंटिलेटर पर
सरकारी सूत्रों के अनुसार, फंड के अभाव में विकास की फाइलें भी वेंटिलेटर पर हैं। इसका फटका नियोजन समिति पर हो रहा है। इसके अलावा कुछ जिलों में महायुति में गड़बड़झाला के कारण निधि खर्च पर असर पड़ा है।
सरकार की तिजोरी खाली
चुनाव के बाद अतिवृष्टि और बाढ़ से राज्य की तिजोरी पर बोझ बढ़ा है। नुकसान की भरपाई के बहाने सरकार तिजोरी को खाली बता रही है। कुछ जिलों में किसानों को और बाढ़ से घरों को हुए नुकसान की तात्कालिक मदद के तौर पर नियोजन समिति से निधि खर्च की अनुमति दी गई थी।
