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मंत्रों की गूंज, फूलों का श्रृंगार…बड़े हनुमान जी का जन्मोत्सव शुरू

 -संगम तट पर लेटे हनुमान जी के पांच दिवसीय जन्मोत्सव अनुष्ठान का भव्य प्रारंभ

राजेश सरकार / प्रयागराज

तीर्थराज प्रयागराज में आस्था का एक अलौकिक दृश्य देखने को मिल रहा है। कलयुग के जाग्रत देव और भक्तों के संकटमोचन श्री बड़े हनुमान जी महाराज (लेटे हनुमान जी) का पांच दिवसीय भव्य जन्मोत्सव अनुष्ठान मंगलवार (3 नवंबर 2026) से पूरी भव्यता और श्रद्धा के साथ शुरू हुआ। पहले दिन की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और देव आराधना के साथ हुई, जिसने पूरे संगम क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
वैदिक अनुष्ठान : सप्त शुद्धि और महागणपति हवन
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, किसी भी बड़े अनुष्ठान की शुरुआत विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा से होती है।
– सप्त शुद्धि: प्रातः काल सबसे पहले मंदिर परिसर और वातावरण की पवित्रता के लिए ‘सप्त शुद्धि’ का अनुष्ठान संपन्न किया गया।
अथर्वशीर्ष महा गणपति हवन
इसके बाद विद्वान आचार्यों के सानिध्य में गणपति अथर्वशीर्ष के सस्वर पाठ के साथ महाहवन शुरू हुआ। आहुतियों की सुगंध और मंत्रों की ध्वनि से वातावरण पूरी तरह शुद्ध हो गया।
अष्टद्रव्य महा गणपति हवन गणेश जी को अति प्रिय आठ पवित्र द्रव्यों (अष्टद्रव्य) से विशेष आहुतियां दी गईं, ताकि पांच दिनों तक चलने वाला यह जन्मोत्सव निर्विघ्न और लोक-कल्याणकारी सिद्ध हो।
फूलों से अलौकिक श्रृंगार
जन्मोत्सव के पहले ही दिन बड़े हनुमान जी महाराज का फूलों से अद्वितीय और अकल्पनीय श्रृंगार किया गया। रंग-बिरंगे, सुगन्धित देसी और विदेशी फूलों से सजे प्रभु के विग्रह को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात देवलोक धरती पर उतर आया हो। मंदिर में प्रवेश करते ही भक्तों का मन स्वतः ही ईश्वर की आराधना में गोते लगाने लगा। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी प्रभु की एक झलक पाते ही श्रद्धालुओं की सारी थकान कपूर की तरह उड़ गई।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने चखा प्रसाद
धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्णता के बाद मंदिर प्रशासन की ओर से एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। संगम तट पर आए हजारों श्रद्धालुओं, संतों और स्थानीय भक्तों ने कतारबद्ध होकर पूरी श्रद्धा के साथ प्रसाद ग्रहण किया। ‘जय बजरंगबली’ और ‘हर हर महादेव’ के गगनभेदी जयकारों के बीच देर शाम तक भंडारे में प्रसाद वितरण चलता रहा।
आगे के दिनों का आकर्षण
आज पहले दिन की भव्यता के साथ आने वाले चार दिनों में आस्था का यह सैलाब और बड़ा रूप लेने वाला है। पांच दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन प्रभु के अलग-अलग रूपों के दर्शन, सुंदरकांड पाठ, महाआरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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