अनिल मिश्र / बोधगया
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) पटना, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार की ओर से गुरुवार को भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) बोधगया में स्थानीय पत्रकारों के लिए क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला (वार्तालाप) का आयोजन किया गया। इस बीच नशे की लत से और नशे से दूर रखना और इसके रोकथाम के लिए मीडिया को व्यापक अभियान चलाते हुए सनसनीखेज खबर नहीं परोसकर, बल्कि नशे से दूर रहने के लिए युवाओं को प्रेरित करने पर बल देने की बात कही गई। देश में नक्सल उन्मूलन के बाद पूरे देश से नशा का सर्वनाश करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की 2029 तक नशामुक्त भारत बनाने का सपना साकार करने में “स्वस्थ्य युवा, नशामुक्त भारत “। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं स्वागत भाषण पीआईबी पटना के उपनिदेशक लौकिक पारीख ने किया। वहीं मुख्य अतिथि आइआइएम के निदेशक प्रो. विनीता एस सहाय, विशिष्ट अतिथि मगध प्रक्षेत्र आईजी विकास वैभव, बिहार नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिक्षक सैयद शारिक उमर, यूनिसेफ बिहार के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ प्रेरणा कौल, होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रविकांत सिंह, दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में मनोवैज्ञानिक के प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह सहित पटना क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान के अनुसंधानकर्ता अशोक कुमार सिन्हा आदि ने नशामुक्त भारत बनाने की परिकल्पना स्थापित करने हेतु अपने विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर गया (मगध) क्षेत्र के पत्रकारों के साथ -साथ आइआइएम बोधगया में पढ़ाई कर रहे छात्र छात्राओं ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर नशामुक्त भारत बनाने का संकल्प लिया।इस अवसर पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो पटना के अधिक्षक सैयद शारिक उमर ने पत्रकारों एवं आगंतुक सभी अतिथियों, पीआईबी के अधिकारियों सहित सभी लोगों ने शपथ लेते हुए कहा कि हमलोग खुद भी नशा नहीं करेंगे और कोई आसपास में नशा कर रहे लोगों को भी नशामुक्त करवाना है। क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला (वार्तालाप) कार्यक्रम के प्रारंभ में भानु कुमार झा , क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी , केंद्रीय संचार ब्यूरो क्षेत्रीय कार्यालय , गया जी ने पैनल के सदस्यों का परिचय देते हुए चर्चा की शुरुआत की। लौकिक पारख ने सभी अतिथियों का अभिनंदन किया। इसके पश्चात प्रो. विनिता एस. सहाय ने लौकिक पारख को सम्मानित किया।इस बीच पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) पटना के उप निदेशक लौकिक पारख ने ‘वार्तालाप’ कार्यक्रम की अवधारणा और उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य पत्रकारों के साथ संवाद स्थापित करना तथा केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, नीतियों और उपलब्धियों की जानकारी प्रभावी ढंग से उन तक पहुंचाना है।इस संबंध में उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक विषय पर जन-जागरूकता बढ़ाने में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा शक्ति और नशा मुक्ति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। युवाओं को नशे से बचाकर ही उनकी ऊर्जा और क्षमता का सकारात्मक उपयोग राष्ट्र निर्माण में किया जा सकता है। इस बीच इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईआईएम बोधगया की निदेशक प्रो. विनिता एस. सहाय ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में पत्रकारों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि आज विश्व अनेक प्रकार के उथल-पुथल और चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में समाज को सही दिशा देने के लिए मीडिया की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। इस बीच उन्होंने बिहार की बदलती पहचान और राज्य में विकसित हो रहे शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका का उल्लेख किया। आईआईएम बोधगया में लगभग 1,600 आवासीय विद्यार्थियों की उपस्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान युवाओं के व्यवहार, उनकी आकांक्षाओं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को करीब से समझता है। वहीं विशिष्ट अतिथि मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब देश का युवा सही दिशा में आगे बढ़े और अपनी असीम ऊर्जा का उपयोग सकारात्मक कार्यों में करे। उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास, आत्मबोध और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस बीच उन्होंने नशे के कुछ स्वरूपों के सामान्य हो जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि युवाओं के बीच नशे को सामान्य या आकर्षक गतिविधि के रूप में प्रस्तुत किए जाने की प्रवृत्ति को रोकना जरूरी है। इसके स्थान पर आत्मविश्वास, रचनात्मकता और सकारात्मक जीवन मूल्यों का उपज करवाना जरुरी है।इस बीच मगध प्रक्षेत्र के आईजी विकास वैभव ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सामाजिक चुनौतियों और युवाओं को प्रभावित करने वाले नकारात्मक प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा तथ्यों के आधार पर उनका पर्दाफाश करने में जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित किया।इस संबंध में उन्होंने कहा कि यदि युवा नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं, तो विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना कठिन होगा। इसलिए युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना सरकार, समाज, परिवार और मीडिया की साझा जिम्मेदारी है। वहीं नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो पटना के अधीक्षक सैयद शारिक उमर ने नशे की समस्या से निपटने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। चर्चा के दौरान नशे के विभिन्न स्वरूपों, युवाओं पर इसके प्रभाव और भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को रेखांकित किया गया।
इस संबंध में उन्होंने नशे की समस्या से निपटने के लिए तीन आयामी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई। नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर नियंत्रण, नशे की मांग में कमी तथा नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों का उपचार और पुनर्वास। नशा मुक्ति के प्रयासों में प्रशासनिक एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों, परिवारों और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
जबकि यूनिसेफ पटना इकाई की स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रेरणा कौल ने प्रस्तुति के माध्यम से नशे से संबंधित विषयों पर जिम्मेदार और संवेदनशील पत्रकारिता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों के संबंध में रिपोर्टिंग करते समय उचित शब्दों का चयन किया जाना चाहिए, ताकि उनके प्रति कलंक और भेदभाव को बढ़ावा न मिले।इस बीच उन्होंने “Report to help, not to harm” के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि मीडिया रिपोर्टिंग का उद्देश्य प्रभावित व्यक्तियों की सहायता करना, जागरूकता बढ़ाना और समाधान की दिशा में योगदान देना होना चाहिए।इसके साथ ही सनसनीखेज खबरें की जगह नशे के खिलाफ सकारात्मक खबरें परोसकर आमलोगों के साथ साथ खासकर युवाओं को इससे दूर रहने को लेकर अच्छी खबर सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने रोकथाम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए समय रहते जागरूकता, उचित पहचान, परामर्श, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था जरूरी है।उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को नशे के आकर्षक दिखने वाले बाहरी पहलुओं के पीछे छिपे गंभीर परिणामों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है। परिवार, शिक्षण संस्थान और समाज मिलकर युवाओं को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र मुजफ्फरपुर में मनोविज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविकांत सिंह ने कहा कि नशे की समस्या किसी एक व्यक्ति या वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को प्रभावित करती है। इसके समाधान के लिए सभी की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने तंबाकू के सेवन, विशेषकर खैनी जैसी आदतों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा गांव और प्रखंड स्तर पर खेल सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया, ताकि युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा सके।उन्होंने बताया कि तंबाकू छोड़ने में सहायता के लिए राष्ट्रीय तंबाकू छोड़ो हेल्पलाइन 1800-11-2356 के माध्यम से परामर्श और अनुवर्ती कॉल की सुविधा उपलब्ध है।
