गृहमंत्री अमित शाह ‘लोकतंत्र बचाओ’ नामक आंदोलन के तहत पदयात्रा वगैरह करते हुए दिखाई देने लगे हैं। मोदी-शाह की तानाशाही के विरुद्ध कांग्रेस पार्टी और ‘इंडिया’ गठबंधन जन-आंदोलन कर रहा है। इसलिए भाजपा भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रति-आंदोलन कर रही है। गृहमंत्री और उनके लोग इस तरह के ढोंग के कारण बेनकाब हो रहे हैं। अमित शाह कितने बकवास गृहमंत्री हैं, इसका नजारा रविवार को मुंबई के जुहू इलाके में देखने को मिला और इसे पूरी दुनिया ने देखा। हिंदी फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन हर रविवार जुहू स्थित ‘जलसा’ बंगले के बाहर प्रशंसकों से मिलते हैं, लेकिन १ नवंबर की सुबह का दृश्य मुख्यमंत्री फडणवीस और देश के गृहमंत्री अमित शाह को शर्मसार करने वाला था। ‘जलसा’ के दरवाजे खुलते ही महानायक बच्चन सामने आए तो वह ‘बुलेटप्रूफ’ कांच के पिंजरे में थे। इसी बुलेटप्रूफ कांच के पिंजरे से बच्चन ने अपने प्रशंसकों का अभिवादन किया। बच्चन की उम्र ८४ वर्ष है। वे अब शारीरिक रूप से थक चुके हैं। ऐसे महानायक को बुलेटप्रूफ पिंजरे में घूमना पड़ रहा है, बच्चन और उनके परिजनों को सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा है, यह मुख्यमंत्री फडणवीस और केंद्रीय गृहमंत्री शाह की असफलता है। राज्य में कानून-व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं। लॉरेन्स बिश्नोई गैंग के नाम से व्यापारियों, बिल्डर्स, सिने अभिनेताओं और निर्माताओं को धमकियां मिल रही हैं। फिरौती के लिए ये धमकियां दी जा रही हैं। इसका मतलब यह है कि देश में आज किसी को भी सुरक्षित महसूस नहीं हो रहा है, लेकिन लोकतंत्र के संरक्षण के लिए फडणवीस, अमित शाह वगैरह लोग पुलिस बंदोबस्त में ‘रैली’ निकाल रहे हैं। जहां आपके राज्य में जनता ही सुरक्षित नहीं है, वहां लोकतंत्र की रक्षा के लिए सरकारी रैलियां निकालकर आप क्या हासिल कर रहे हैं? श्री बच्चन ‘जलसा’ बंगले के बाहर बुलेटप्रूफ कांच के पिंजरे में बाहर आए, क्योंकि कुछ दिनों पहले टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर बिश्नोई गैंग के शूटर्स ने गोली चलाई थी। इसी
बिश्नोई गैंग से
अमिताभ बच्चन, शाहरुख-सलमान खान वगैरह को खतरा है, वे सभी दलों और सत्ता में आने वाली सरकारों को साधकर चलते हैं। फिर बच्चन के पीछे ये आपराधिक गिरोह क्यों पड़े हैं? इसका खुलासा मुंबई पुलिस को करना चाहिए। भारत का सबसे बड़ा और लोकप्रिय फिल्म अभिनेता बुलेटप्रूफ कांच के पिंजरे में चल रहा है, यह दृश्य देखकर गृहमंत्री शाह को नैतिकता के मुद्दे पर इस्तीफा ही दे देना चाहिए। वे सरदार पटेल की कुर्सी पर बैठे हैं और खुद की कुर्सी के पीछे उन्होंने सरदार पटेल की भव्य तस्वीर लगाई है। सरदार पटेल ने सशस्त्र सेना रखने वाले हैदराबाद के निजाम का सफाया किया था और इन अमित शाह से एक आपराधिक गिरोह का बंदोबस्त नहीं हो रहा है। जो शाह नक्सलवाद का सफाया करने, कश्मीर से हिम्मत से धारा ३७० हटाने वगैरह का दावा करते हैं, विपक्षी दलों को तोड़ते हैं, विधायक-सांसद खरीदकर मनचाहा खेल खेलते हैं, उन शाह से बिश्नोई गैंग का खात्मा नहीं किया जा रहा है, इस बात का आश्चर्य होता है। जब यह आलेख लिखा जा रहा था, तब नागपुर के दस प्रमुख सर्राफों को बिश्नोई गैंग की ओर से भारी फिरौती के लिए धमकियां मिलने की खबर सामने आई। उसके तुरंत बाद ‘चिंता मत कीजिए। सर्राफों को पूरी सुरक्षा देंगे,’ ऐसी घोषणा मुख्यमंत्री फडणवीस ने की। सवाल सिर्फ इतना है कि इस तरह आप कितने लोगों को विशेष सुरक्षा कवच मुहैया कराने वाले हैं? उसके बजाय उस गैंग का जड़ से सफाया करने की हिम्मत क्यों नहीं दिखाते? यह जो कोई भी लॉरेन्स बिश्नोई है, वह गुजरात की साबरमती जेल में गृहमंत्री अमित शाह के मेहमान के रूप में मजे काट रहा है। इस बिश्नोई का सादा नाखून भी किसी ने नहीं देखा है। वह मानो एक अदृश्य शक्ति के रूप में घूम रहा है और उस अदृश्य शक्ति के इर्द-गिर्द शाह ने
खास सुरक्षा का कवच
खड़ा किया है। बिश्नोई को साबरमती जेल के बाहर नहीं लाया जा सकता, इसके चलते लॉरेन्स के नाम से किसी भी राज्य में कितने भी अपराध हों, उस राज्य की पुलिस इस लॉरेन्स को पूछताछ के लिए अपने राज्य में लेकर नहीं आ सकती। यह एक अजीबोगरीब मामला है। शाह ने मानो अपने स्वार्थ के लिए एक अदृश्य शक्ति का निर्माण किया है और उस अदृश्य शक्ति के जरिए देश में किसी को भी धमकियां दिलाई जाती हैं, किसी से भी वसूली की जाती है या गोलीबारी करके लाशें गिराई जाती हैं। इसी के लिए अमिताभ बच्चन (आयु ८४ वर्ष) जैसे महानायक को बुलेटप्रूफ कांच का पिंजरा लेकर घूमना पड़ रहा है। हमारे देश में लोकतंत्र खतरे में है, वैसे ही देश के आम लोग भी खतरे में हैं। सिर्फ शाह और उनकी ‘शाही’ ही मजे में है। भारत में अडानी ने काफी उद्योग खड़े किए। रक्षा क्षेत्र में भी वे घुस गए। अब उन्हें एक नया उद्योग शुरू करना पड़ेगा और वह है कांच के बुलेटप्रूफ पिंजरे बनाने का। जब तक मोदी-शाह का शासन है, तब तक किसी को भी चैन से और सुरक्षित जीने नहीं दिया जाएगा। शाह को गृहमंत्री के रूप में इस बात की पीड़ा होनी चाहिए। लोगों को कमजोर, भयभीत करके अपना आश्रित बनाना उनकी मानसिकता है और उस काम के लिए उन्होंने लॉरेन्स बिश्नोई का अदृश्य भूत खड़ा किया है। असल में इस भूत का नाम ‘लॉरेन्स शाह’ या ‘लॉरेन्स मोदी’ होना चाहिए था। सलमान खान ने काले हिरण का शिकार किया था, इसलिए किसी का गुस्सा हो सकता है, लेकिन जिन लोगों को धमकियां मिलीं और जिन पर हमले हुए, उन्होंने कोई शिकार नहीं किया था। सलमान तो मोदी के राज्य में पतंग उड़ाने गए थे और बच्चन गुजरात पर्यटन के ब्रांड एंबेसडर हैं। मोदी के करीबियों पर यह अदृश्य शक्ति हमले कर रही है, इसमें कुछ तो अलग ही पेच जरूर है। बच्चन के इर्द-गिर्द का बुलेटप्रूफ पिंजरा यही बात बयां कर रहा है।
