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दिवाली पर निकला जेब का दम!

-अनाज, दाल, दूध, चीनी और चिकन तक महंगाई का बम! दिसंबर तक खाद्य महंगाई १० प्रतिशत पहुंचने की आशंका

सामना संवाददाता / मुंबई-नई दिल्ली

दिवाली की खुशियों के बीच महंगाई ने आम आदमी की जेब का दम निकालना शुरू कर दिया है। त्योहार पर घर रोशन करने की तैयारी है, लेकिन रसोई का बजट पहले ही डगमगाने लगा है। अनाज, दाल, चीनी, दूध और चिकन जैसी रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। ऊपर से कमजोर मानसून ने किसानों की मुश्किलें बढ़ाकर आने वाले महीनों में महंगाई का नया खतरा पैदा कर दिया है।
रॉयटर्स की तीन नवंबर की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, देश के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में बड़ी संख्या में किसान पानी की कमी से जूझ रहे हैं। महाराष्ट्र के जालना जिले में औसत से लगभग ४८ प्रतिशत कम बारिश होने के कारण कई किसान गेहूं और चने की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। सितंबर में खाद्य महंगाई दर बढ़कर ७.७४ प्रतिशत पहुंच गई थी, जबकि समग्र खुदरा महंगाई ५.५४ प्रतिशत रही। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने आशंका जताई है कि अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में खाद्य महंगाई लगभग दस प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
कम बारिश के कारण रबी फसलों की बुवाई प्रभावित होने की आशंका उत्पादन घटने पर बाजार में खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति सीमित हो सकती है। दूसरी ओर कमजोर रुपया और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतें आयात को महंगा बना रही हैं। इसका सबसे अधिक असर कम और मध्यम आय वाले परिवारों पर पड़ सकता है। दाल, दूध और अंडे जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ महंगे होने पर परिवारों को अपने भोजन के बजट में कटौती करनी पड़ सकती है।
दिवाली की मिठाई भी महंगी, आगे थाली पर आफत
त्योहारी खरीदारी के बीच खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं के सामने नई मुश्किल खड़ी कर दी है। महगांई बढ़ने से परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों और त्योहार के अतिरिक्त खर्च के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है, सूखे से प्रभावित किसानों को राहत देना और बाजार में आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना। सवाल यही है कि जब खेतों में पानी नहीं, बाजार में कीमतों पर दबाव है और त्योहार पर खर्च बढ़ रहा है, तो आम आदमी की जेब को राहत आखिर कब मिलेगी।
चीनी में कड़वाहट, गेहूं के दामों में उबाल!
बीते एक वर्ष में चीनी की कीमतें लगभग ३० प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। गेहूं के दाम करीब दो वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। दूध, अंडे और दुग्ध उत्पादों की महंगाई सितंबर में बढ़कर ५.१ प्रतिशत रही। मुर्गीपालन उद्योग भी पशु आहार, परिवहन और ऊर्जा की बढ़ती लागत से परेशान है। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, जनवरी से चिकन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

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