सामना संवाददाता / नासिक
महाराष्ट्र सूखे से जूझ रहा है और स्थिति बेहद भयानक है। किसानों को बैंकों के नोटिस आ रहे हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों को आपस में खींचतान करने और लगातार दिल्ली भागने के बजाय खेतों में आकर किसानों को ढांढस बंधाना चाहिए और हरसंभव मदद करनी चाहिए। इन शब्दों में शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आक्रोश जताते हुए कहा कि घोषणा के अनुसार ५,००० रुपए की मामूली मदद भी सरकार ने अभी तक नहीं दी है। सूखा तो भीषण है ही, उससे भी ज्यादा सरकार की यह लापरवाही घातक है।
मंगलवार दोपहर शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने सिन्नर तालुका के मनेगांव में सूखे की स्थिति का मुआयना किया और किसानों से बातचीत की। उन्होंने किसानों की समस्याएं जानकर उन्हें ढांढस बंधाया। इस दौरान वे मीडिया से बात कर रहे थे। भीषण सूखे के कारण फसलें झुलस जाने से किसान संकट में हैं। सरकार ने पिछले साल भी मुआवजा नहीं दिया। हमें लगा था कि दिवाली आ रही है, सरकार जल्द ही किसानों की मदद करेगी। लेकिन किसी को अभी तक ५,००० रुपए भी नहीं मिले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सिंहस्थ कुंभ मेले के आयोजन के लिए हेलिपैड पर भारी खर्च करने वाली सरकार किसानों पर खर्च क्यों नहीं कर रही है? राज्य के २६५ तालुकाओं में सूखा है, इस पर मुख्यमंत्री और उनके साथियों को सोचना चाहिए। आपस में खींचतान करने और लगातार दिल्ली भागने के बजाय किसानों को सांत्वना देने के लिए उन्हें खेतों में आना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र, राज्य और नगरपालिकाओं में आपकी ही सत्ता होने के बावजूद आप आखिर किसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं?
घोषणा करके छोड़ देना सही नहीं
सुपर अल नीनो के कारण जलवायु परिवर्तन की मार पड़ रही है और यह संकट कम से कम दो साल का है। इसलिए अगले कुछ महीनों के लिए तुरंत मदद मिलना आवश्यक है। इस विषय पर विशेषज्ञों, सांसदों, विधायकों और अन्य लोगों से चर्चा होना जरूरी है, इसलिए हम सत्र की मांग कर रहे हैं। आदित्य ठाकरे ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार का सिर्फ घोषणा करना और स्थिति को जस का तस छोड़ देना सही नहीं है।
`दिवाली आ गई, लेकिन `५,००० भी नहीं मिले’
दिवाली दो दिन दूर है, लेकिन सरकार की तरफ से ५,००० रुपए की मदद भी नहीं आई है। फसलें पूरी तरह झुलस गई हैं, मवेशियों के लिए चारा नहीं बचा है, २०० से ३०० रुपए की दर से एक डिब्बा पानी खरीदकर लाना पड़ रहा है, ऐसी व्यथा किसानों ने आदित्य ठाकरे के सामने रखी। उन्होंने सरकार के खिलाफ गुस्सा जताते हुए कहा कि सरकार ने केवल झूठे आश्वासन दिए हैं, `नमो किसान’ के राज्य सरकार वाले पैसे आए ही नहीं और केवाईसी के नाम पर सब कुछ रोक दिया गया है।
