किसी जमाने में ‘जिगरी दोस्त’ रहे अफगानिस्तान और पाकिस्तान अब एक-दूसरे के ‘जानी दुश्मन’ बन गए हैं। पिछले एक हफ्ते में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच शनिवार और रविवार, दो दिनों तनाव चरम पर रहा। पहले पाकिस्तान ने सीधे सीमा पार करके अफगानिस्तान के कंधार प्रांत में ड्रोन से हवाई हमले किए और मिसाइलें दागीं। उसके बाद, अफगान तालिबान सैनिकों ने भी पाकिस्तान को जोरदार जवाब दिया। हालांकि, पाकिस्तान ने इन हमलों में २०० तालिबानियों को मारने का दावा किया, लेकिन अफगान सरकार ने कहा है कि उसके केवल २० सैनिक मारे गए। दूसरी ओर हमारे सैनिकों ने पाकिस्तानी हमले का करारा जवाब दिया और हमारे हमले में ५८ पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, अफगान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा। इन हमलों के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा सीमा पर अत्यधिक तनाव पैदा हो गया है। इससे पहले, १० अक्टूबर को तहरीक-ए-तालिबान के एक हमले में एक पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट कर्नल और एक मेजर रैंक के अधिकारी सहित १० सैनिक मारे गए थे। उसके बाद पाकिस्तान ने यह रुख अपनाया है कि उसने आत्मरक्षा में यह हमला किया, जबकि अफगान सरकार ने भी कहा है कि उसने आत्मरक्षा में पाकिस्तान पर हमला किया। अगर जंग का यह दौर यूं ही जारी रहा तो इससे भारत को फायदा होगा इसलिए अब पाकिस्तान में ही यह आवाज उठने लगी है कि यह जंग बंद करो। इससे दबाव में आई पाकिस्तान सरकार की स्थिति ‘इधर कुआं-उधर खाई’ जैसी हो गई है। असल में, २०२१ में अफगानिस्तान में
तालिबान शासन
के फिर से सत्ता में आने के बाद से डूरंड रेखा लगातार धधक रही है। इस सीमा के कई हिस्सों को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है। इसके अलावा, आतंकवादी संगठन टीटीपी, यानी तहरीक-ए-तालिबान (पाकिस्तान) का इस क्षेत्र पर कब्जा है। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता है कि यह आतंकवादी संगठन अफगान सरकार के समर्थन से पाकिस्तान में लगातार आतंकवादी हमले करता रहता है। असल में पाकिस्तान का पेट दर्द अलग ही है। जब अमेरिका का अफगानिस्तान पर दबदबा था, तब पाकिस्तान ने सभी पूर्व तालिबान शासकों, मुजाहिदीन और सैनिकों को पनाह दी थी। चूंकि इस्लामी चरमपंथियों और आतंकवादियों को पालना-पोसना पाकिस्तानी सेना और सरकार की विदेश नीति का हिस्सा है इसलिए पाकिस्तान ने अल-कायदा के ओसामा बिन लादेन से लेकर आईएसआईएस, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जैश-ए-मोहम्मद और कई अन्य आतंकवादी संगठनों और उनके नेताओं तक, कई आतंकवादी संगठनों और उनके नेताओं को हमेशा पाला-पोसा है और पाकिस्तान का ये धंधा आज भी जारी है। पाकिस्तान उम्मीद करता है कि अगर पाकिस्तान उनका ख्याल रखता है तो सभी आतंकवादी संगठन को उसकी बात माननी चाहिए, लेकिन तालिबान इस मामले में उस्ताद निकला। तालिबान सिर्फ इसलिए गुलाम नहीं बनना चाहता, क्योंकि पाकिस्तान ने उस पर एहसान किया है। पाकिस्तान की योजना थी कि अफगानिस्तान पाकिस्तान का पांचवां राज्य बना रहे और अफगानिस्तान पाकिस्तानी सेना और सरकार के नियंत्रण में एक पाकिस्तानी प्रांत की तरह उसके आदेशों का पालन करे। पाकिस्तान का इरादा अफगानिस्तान के रास्ते खाड़ी देशों तक अपनी पहुंच बढ़ाकर अपने व्यापार का विस्तार और अपना महत्व बढ़ाना था। हालांकि, अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने के बाद तालिबान ने
पाकिस्तान के इस मंसूबे
को मिट्टी में मिलाते हुए पाकिस्तान के नियंत्रण में न रहकर एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में अपनी पहचान बनाने पर जोर दिया। इसके अलावा, पाकिस्तान के साथ संबंध तनावपूर्ण रहते हुए तालिबान शासकों ने हिंदुस्थान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने में रुचि दिखाई। इसके अलावा चूंकि हिंदुस्थान ईरान में चाबहार बंदरगाह विकसित कर रहा है, जो अफगानिस्तान से होकर गुजरता है इसलिए हिंदुस्थान भी अफगानिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है। तालिबान सरकार की हिंदुस्थान के साथ बढ़ती नजदीकी और अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की एक हफ्ते की हिंदुस्थान यात्रा ने पाकिस्तान का उदरशूल और बढ़ा दिया है। अफगान विदेश मंत्री ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर को हिंदुस्थान का अभिन्न अंग बताकर पाकिस्तान के जख्मों पर नमक छिड़का है। यही सब अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के ताजा हमले की पृष्ठभूमि है। आतंकवाद की दो तलवारें एक म्यान में नहीं रह सकतीं इसीलिए आज पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन गए हैं। दोनों देशों के बीच तनाव के बाद डूरंड रेखा पर आग लग गई है और ताजा हमलों में दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ है। पाकिस्तान चाहता था कि अफगान सरकार उसके इशारों पर नाचती रहे; लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रूस और अमेरिका जैसी महाशक्तियों को नचाने के बाद क्या अफगानिस्तान पाकिस्तान की दाल गलने देगा? इन सब घटनाक्रमों के बीच अगर भारत से अफगानिस्तान का रिश्ता ‘दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है’ वाली कहावत की तर्ज पर मजबूत हो रहा है तो यह अच्छी ही बात है!
