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संपादकीय : अरे, बूट का सदुपयोग करो!

भारत की जनता का देश की न्यायपालिका से विश्वास उठ गया है। खासकर मोदी राज आने के बाद से न्यायपालिका का जो अधोपतन हुआ है, उसे देखकर राम शास्त्री भी स्वर्ग में आंसू बहा रहे होंगे। खैर, जो भी हो, आज भारत की जनता के लिए सर्वोच्च न्यायालय ही आशा की एकमात्र किरण है। इसीलिए सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई के साथ जो हुआ, उसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। एक वकील ने सनातन धर्म का अपमान हुआ है कहकर मुख्य न्यायाधीश गवई पर बूट फेंकने की कोशिश की। यह सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही के दौरान हुआ। वह सनकी वकील मुख्य न्यायाधीश गवई तक नहीं पहुंच सका। इस कारण अनर्थ टल गया। देश की न्यायपालिका सड़ चुकी है। वहां सच्चा न्याय पाना मुश्किल हो गया है। भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद न्यायपालिका तक पहुंच गया है। चूंकि अदालतें मोदी-शाह के दबाव में काम कर रही हैं, इसलिए लोकतंत्र और संविधान पर रोजाना राजनीतिक हमले हो रहे हैं। कोई देशभक्त इस कारण से इतना गुस्सा जाहिर करता तो समझ में आता, लेकिन उस वकील ने यह कहते हुए कि वह सनातन धर्म का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा, मुख्य न्यायाधीश गवई पर बूट फेंकने की कोशिश की। मुख्य न्यायाधीश गवई से पहले चंद्रचूड़ नाम के एक मुख्य न्यायाधीश थे। वे आजकल अदालत में अपने कृत्यों के बारे में खुलासे करते घूम रहे हैं। उन्होंने मोदी को अपने घर भजन-कीर्तन के लिए भी आमंत्रित किया था। कई मुख्य न्यायाधीशों ने सेवानिवृत्ति के बाद मोदी सरकार में नौकरियां स्वीकारी हैं। कुछ राज्यपाल बने, कुछ आयोगों के अध्यक्ष के तौर पर विराजित हुए हैं। सच तो यह है कि न्याय बेचने के ऐसे मामले उस लायक हैं, लेकिन यहां सनातन के नाम पर मुख्य न्यायाधीश गवई पर गुस्सा निकाला गया। कहा गया कि मुख्य न्यायाधीश गवई ने कथित तौर पर भगवान विष्णु पर एक टिप्पणी की। इससे इस सनातन वकील की भावनाएं आहत हुर्इं। सितंबर में, गवई ने एक याचिकाकर्ता द्वारा मध्य प्रदेश के खजुराहो में एक खंडित मूर्ति के पुनर्निर्माण और उसकी जगह दूसरी मूर्ति स्थापित करने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। उन्हें लगा कि यह याचिका
प्रचार पाने के लिए
दायर की गई थी। जब याचिकाकर्ता ने बहस शुरू की, तो मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, ‘अब आप भगवान के पास जाइए और उनसे कुछ करने के लिए कहिए। आप भगवान विष्णु के परमभक्त हैं। इसलिए प्रार्थना और ध्यान कीजिए, लेकिन यहां न्याय कानून के अनुसार होगा।’ कुछ लोगों को यह टिप्पणी आहत करने वाली लगी, तो मुख्य न्यायाधीश गवई ने बिना किसी हिचकिचाहट के खेद व्यक्त किया। इतना सब होने के बावजूद, इस सनकी वकील ने इतनी घटिया हरकत की। अब सनातन धर्म के रूप में किस भगवान का अपमान हुआ? नरेंद्र मोदी खुद ‘नॉन बायलॉजिकल’ पैदा हुए हैं। इसलिए वे मनुष्य नहीं हैं। मोदी खुद ऐसा कहते हैं। मोदी के भक्त उन्हें विष्णु का तेरहवां अवतार मानते हैं। इसलिए हिंदू धर्मावलंबियों के भगवान विष्णु अलग हैं और भाजपा के अंधभक्तों का विष्णु अवतार अलग है। मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा, ‘जाओ, विष्णु से प्रार्थना करो।’ उस विष्णु का मतलब ‘तेरहवां अवतार’ ही होगा। क्या उस सिरफिरे वकील ने मुख्य न्यायाधीश गवई पर बूट फेंकने की कोशिश इसलिए की क्योंकि तेरहवें अवतार का अपमान हुआ था? मुख्य न्यायाधीश गवई पर बूट फेंकने की कोशिश यानी भारतीय संविधान पर हमला है। संविधान बदलने की साजिश को नाकाम होने के बाद संविधान पर बूट फेंकना भाजपा और संघ की विचारधारा विषबेल वन है। यह कृत्य निंदनीय और बेशर्मी भरा है। कोई भी सच्चा हिंदू ऐसा बेशर्मी भरा काम करने की हिम्मत नहीं करेगा। मुख्य न्यायाधीश गवई पर बूट फेंकने की कोशिश करने वाला वकील सनातनी हिंदू धर्म का हत्यारा है। इन्हीं सनातनियों ने संत ज्ञानेश्वर को बहिष्कृत कर दिया था। इन्हीं सनातनियों ने छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक का विरोध किया था। इन्हीं सनातनियों ने महात्मा फुले पर गोबर फेंका था और इन्हीं सनातनियों ने प्रबोधनकार ठाकरे के जीवित रहते हुए उनकी शवयात्रा निकाली थी। यही सनातनी गोडसे जयंती मनाते हैं और आज भी गांधी पर गोली चलाकर अपनी विकृत खुशी व्यक्त करते हैं। इन्हीं सनातनियों ने पुणे में मराठा साम्राज्य का झंडा उतारकर ब्रिटिश यूनियन जैक फहराया था।
इन्हीं सनातनियों ने
भारत के आजादी की लड़ाई और आजादी के बाद तिरंगा फहराने का विरोध किया था। पिछले दस वर्षों में, इन्हीं सनातनियों के चलते भारत का लोकतंत्र संकीर्ण और धार्मिक तौर पर कट्टर हो गया है। एक हिंदू राज का मतलब अडानी, धार्मिक कट्टरपंथियों का राज नहीं है। एक हिंदू राज का मतलब अंधभक्तों का राज नहीं है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने लोगों में धार्मिक कट्टरता, अंधभक्ति ही हिंदुत्व है, ऐसा विचार पोषित किया और राज किया। मुख्य न्यायाधीश गवई पर बूट फेंकने की कोशिश करने वाला वकील राकेश किशोर ऐसे ही अंधभक्तों का बाप लगता है। उनका कहना है, ‘भगवान विष्णु मेरे सपने में आए और कहा, इस तरह अपमानित होने के बावजूद तुम चैन की नींद वैâसे सो सकते हो? उठो, उठो, बदला लो।’ इसलिए सनातन धर्म को गौरव दिलाने के लिए, इस सिरफिरे ने मुख्य न्यायाधीश पर बूट फेंकने की कोशिश की। मुख्य न्यायाधीश गवई ने अब तक बहुत अच्छा काम किया है। उन्हें ज्यादा समय नहीं मिला। उन्होंने इस दौरान खूब व्याख्यान और भाषण दिए। उन्होंने संयम से काम लिया। वे संघ परिवार के जाल में नहीं फंसे। फिर भी, वे सनातनियों के निशाने पर आ गए। नरेश अग्रवाल नाम का एक महान हिंदुत्ववादी वर्तमान में भाजपा की सेवा कर रहा है। उसने एक बार संसद में एक बयान दिया था जो इस प्रकार था…
व्हिस्की में विष्णु बसे,
रम में श्रीराम
जिन में माता जानकी
और ठर्रे में हनुमान…
ऐसे भजन गाने वाला यह आदमी भाजपा में है। तब एक भी सनातनी को गुस्सा नहीं आया। जब इस अग्रवाल ने दिल्ली स्थित मुख्यालय पहुंचकर भाजपा में प्रवेश किया, तो विष्णु के तेरहवें अवतार ने उसका विरोध नहीं किया। इन्हीं सनातनियों ने मुख्य न्यायाधीश गवई पर बूट फेंकने की कोशिश की। गवई ने बूट फेंकने वाले को माफ कर दिया और जब्त किया हुआ बूट भी लौटा दिया। ‘इस बूट का सदुपयोग करो और उन्हीं को मारो जो जूते खाने लायक हों,’ शायद यही सलाह मुख्य न्यायाधीश गवई देना चाहते होंगे!

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