अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इस समय भारत समेत पूरी दुनिया पर दादागीरी कर रहे हैं। वह कई देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकी दे रहे हैं, लेकिन अब ट्रंप के ही अमेरिका में ‘शटडाउन’ की नौबत आ गई है। जिसके चलते अमेरिका में पूरा सरकारी कामकाज ठप हो गया है। जब तक अमेरिकी सीनेट ‘फंडिंग बिल’ पारित नहीं कर देती, तब तक ‘शटडाउन’ जारी रहेगा और सरकारी कर्मचारियों समेत आम अमेरिकी लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अमेरिका में सरकारी वर्ष १ अक्टूबर से शुरू होता है। उससे पहले आगामी वर्ष के लिए सरकारी खर्च के प्रावधानों को अमेरिकी कांग्रेस से मंजूरी मिलनी जरूरी होती है। अगर यह मंजूरी नहीं मिलती तो सरकारी खर्च रुक जाता है और ‘शटडाउन’ का संकट पैदा हो जाता है। अभी यही हुआ है। इस स्थिति के लिए ट्रंप के कुछ बिना सोचे-समझे पैâसले जिम्मेदार हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का रुख यह है कि सरकारी खर्च में कटौती होनी चाहिए। प्रशासनिक खर्च में कटौती होनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में पैâसले भी लिए हैं। हालांकि, ट्रंप सरकार की नीति के तौर पर यह ठीक है, लेकिन ट्रंप की सनक और मनमानी ने इसे बेवजह जटिल बना दिया है। सरकारी खर्च में कटौती के नाम पर ट्रंप महाशय ने स्वास्थ्य सेवा समेत कई जरूरी
सरकारी सेवाओं पर बुलडोजर
चला दिया है। ‘ओबामा हेल्थ केयर सब्सिडी प्रोग्राम’ पर ट्रंप प्रशासन की नीति ने सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच तनाव पैदा कर दिया है। दरअसल, सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी को ‘फंडिंग बिल’ पारित करने के लिए ६० सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी। यह जानते हुए कि उसके पास यह संख्या नहीं है, राष्ट्रपति ट्रंप को कोई ‘सुनहरा रास्ता’ खोजने की कोशिश करनी चाहिए थी, लेकिन अपनी ही हेकड़ी में मस्त ट्रंप ने कोशिश भी नहीं की। उल्टे, उन्होंने ‘ओबामा हेल्थ केयर सब्सिडी प्रोग्राम’ को झटका दिया। उन्होंने कई सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी देकर आग में घी डालने का काम किया। उन्होंने दो दिन पहले ही पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन का मजाक उड़ाने के लिए बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी किया था। इसके चलते विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी अपने रुख पर अड़ी है। स्वाभाविक रूप से, ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तुत अस्थाई विधेयक सीनेट में खारिज हो गया और ट्रंप को अपने कार्यकाल के दौरान एक और शटडाउन की शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले कार्यकाल में शटडाउन अमेरिकी इतिहास का सबसे लंबा, ३५ दिनों तक चला था। वर्तमान शटडाउन कितने समय तक चलेगा, यह
पेच कब तक दूर होता
है, यह स्वास्थ्य सेवा पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के रुख पर निर्भर करता है। ट्रंप की पार्टी इस ‘फंडिंग बिल’ से स्वास्थ्य योजनाओं को बाहर रखने पर अड़ी है, जबकि ‘ओबामा हेल्थ केयर सब्सिडी प्रोग्राम’ को दिए जानेवाले लाभों को बढ़ाया जाना चाहिए, अन्यथा वह बिल का समर्थन नहीं करेगी। विपक्षी दल इस बात पर अड़ा है कि अगर यह लाभ हटा दिया गया तो लाखों अमेरिकियों के लिए चिकित्सा उपचार और दवाइयां महंगी हो जाएंगी और गरीब प्रभावित होंगे। ‘फंडिंग बिल’ इसी झंझट में फंस गया है। राष्ट्रपति ट्रंप इस समय इस विचार से ग्रस्त हैं कि उन्हें भी पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की तरह नोबेल शांति पुरस्कार मिले। चूंकि नोबेल पुरस्कार का भूत उनकी गर्दन पर सवार है इसलिए वे रोज ‘मैंने दुनिया में इतने सारे युद्ध रोक दिए’ जैसे ढोल पीट रहे हैं। दूसरे लोग भी खूब दौड़-धूप कर रहे हैं। हालांकि, दूसरी ओर, वे उन्हीं ओबामा के नाम पर बने स्वास्थ्य योजना में कटौती करके डेमोक्रेटिक पार्टी को तकलीफ देने की कोशिश भी कर रहे हैं। वे डेमोक्रेटिक पार्टी की यह कहकर आलोचना कर रहे हैं कि यह एक ‘जबरन शटडाउन’ है इसलिए इस सवाल का जवाब देने में कि यह शटडाउन संकट कब तक चलेगा, खुद सनकी राष्ट्रपति ट्रंप भी सक्षम नहीं हो सकते!
