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संपादकीय : मोदी मित्रता के ‘हवाई तीर’

प्रधानमंत्री मोदी के एक और ‘मित्र’ ने पाकिस्तान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर करके मोदी मित्रता की दंतकथाओं की हवा निकाल दी है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ एक अहम रक्षा समझौता किया है, जिसके अनुसार, अब किसी एक देश पर हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह समझौता भारत के लिए जितना चौंकानेवाला है, उतना ही खतरनाक भी है। चौंकानेवाला इसलिए क्योंकि पांच महीने पहले मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को गले लगाया था और सऊदी अरब को भारत का ‘विश्वसनीय मित्र’ आदि बताया था। कुछ साल पहले मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उसी क्राउन प्रिंस का स्वागत किया था। अब उनके इसी भरोसेमंद दोस्त ने मोदी की मित्रता की ‘ऐसी की तैसी’ कर दी और भारत के पारंपरिक दुश्मन पाकिस्तान को ‘सुरक्षा कवच’ दे दिया है। यह घटनाक्रम भारत के लिए खतरनाक है, क्योंकि अगर भारत कल को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसा कोई ऑपरेशन करता है तो वह हमला पाकिस्तान के साथ-साथ सऊदी अरब पर भी हमला समझा जाएगा। इसका पाकिस्तान के संबंध में भारत की निर्णय प्रक्रिया पर निश्चित रूप से असर पड़ेगा। हमेशा की तरह भारत ने इस पर एक सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। ‘भारत सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच इस समझौते के सुरक्षा, क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करेगा। उसके बाद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा।’ भारतीय विदेश मंत्रालय ने बस शब्दों की ही
हवा हवाई की
है। वहां पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ-साथ सऊदी अरब के गलबहियां डाल दी हैं और यहां पर मोदी सरकार एक प्रतिक्रिया देने के अलावा कुछ नहीं कर सकी है। कहां चली गई मोदी की सख्त विदेश और रक्षा नीति? मोदी न तो ट्रंप के नाम पर बोल रहे हैं और न ही सऊदी अरब पर कोई टिप्पणी कर रहे हैं। जब मोदी विदेश दौरों पर जाते हैं और वहां के राष्ट्राध्यक्षों से मिलते हैं तो उनका अंधभक्त और ‘गोदी’ मीडिया ऐसी तस्वीर बनाता है मानो मोदी ने उस राष्ट्राध्यक्ष को अपनी जेब ही में रख लिया हो। लेकिन अक्सर यह भ्रम टूटता रहा है। मोदी अब तक सौ से ज्यादा देशों का दौरा कर चुके हैं, उनकी दोस्ती का गुणगान कर चुके हैं, लेकिन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान एक भी देश खुलकर भारत के साथ खड़ा नहीं हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और मोदी की गलबहियों की अब तक क्या कम तस्वीरें प्रकाशित हुई हैं? लेकिन आज की तस्वीर क्या है? ‘माई डीयर प्रâेंफ मोदी’ कहनेवाले ट्रंप ने मोदी की दोस्ती को खूंटी पर टांग दिया और भारत पर ५० प्रतिशत टैरिफ लाद दिया। उन्होंने कम से कम चालीस बार कहा है कि उन्होंने खुद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रुकवा दिया। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को जंजीरों में जकड़े अपराधियों की तरह भारत भेजा। उन्होंने पाकिस्तान के साथ एक बड़ी व्यापारिक ‘डील’ की। उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख
असीम मुनीर को इज्जत
बख्शी। उन्होंने उन्हें ‘व्हाइट हाउस’ में खाना खिलाया। श्री ट्रंप पिछले चार महीनों से हर दिन ‘केम छो ट्रंप’ और ‘हाउडी मोदी’ की लगातार धज्जियां उड़ा रहे हैं, लेकिन मोदी ‘मुंह पर उंगली’ रखकर चुप हैं। श्रीलंका, मालदीव, तुर्की, बांग्लादेश आदि कई देश, जिन्हें मोदी ‘मित्र’ और ‘विश्वसनीय मित्र’ कहते थे, उन्होंने भी मोदी की मित्रता की पतंग की डोर इसी तरह काट दी है। अब सऊदी अरब मान गया है कि पाकिस्तान पर हमला सऊदी अरब पर भी हमला है। मोदी की सख्त विदेश नीति पर पाकिस्तानियों ने सऊदी अरब की ‘कील’ मारकर हवा निकाल दी है। फिर, यह सब मोदी के ७५वें जन्मदिन पर हुआ। ट्रंप ने इस मौके पर भारत को ड्रग तस्करी करनेवाले देशों की सूची में भी डाल दिया। ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान द्वारा मोदी को दिया गया यह ‘जन्मदिन का तोहफा’ मोदी मित्रता का ‘हवाई तीर’ कहा जा सकता है। मोदी की विदेश नीति में न तो कभी ‘तीर’ था और न ही अब ‘हवा’ है। पंडित नेहरू से लेकर डॉ. मनमोहन सिंह तक, सभी कांग्रेसी शासनों में पाकिस्तान हमेशा एक कमजोर राष्ट्र रहा है। लेकिन मोदी के शासन में, पाकिस्तान एक मजबूत देश के रूप में उभरा है और उसे उन सभी राष्ट्राध्यक्षों से मदद मिल रही है, जिन्हें मोदी ने ‘मित्र’ बताया है। सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते ने मोदी की ‘मैत्री डिप्लोमेसी’ को पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया है!

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