मुख्यपृष्ठसमाचारमानसून में जंगरोधी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पर जोर

मानसून में जंगरोधी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पर जोर

सामना संवाददाता / मुंबई

जैसे ही दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भारत के समुद्र तट पर भारी बारिश, ज्यादा नमी और नमक वाली हवाओं के साथ पहुंचता है, इंफ्रास्ट्रक्चर एक्सपर्ट तटीय इलाकों में पब्लिक एसेट्स को डिजाइन और सुरक्षित रखने के तरीके पर फिर से सोचने की बात कह रहे हैं।
इंटरनेशनल ज़िंक एसोसिएशन (इंडिया) के डायरेक्टर डॉ. राहुल शर्मा के मुताबिक, भारत का तटीय इंफ्रास्ट्रक्चर अंदरूनी इलाकों की तुलना में कहीं ज्यादा गंभीर पर्यावरण दबाव में है और इसका ज्यादातर हिस्सा अभी भी ज्यादा एक जैसे तरीके से मेंटेन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर मानसून हमें याद दिलाता है कि इंफ्रास्ट्रक्चर को न सिर्फ उस लोड के लिए डिजाइन किया जाना चाहिए जो वह उठाता है, बल्कि उस पर्यावरण के लिए भी होना चाहिए, जिसमें वह काम करता है।
भारत के ७,५०० किमी के समुद्र तट पर हाईवे, रेलवे सिस्टम, पोर्ट, पुल, एयरपोर्ट, पावर इंप्रâास्ट्रक्चर और पब्लिक बिल्डिंग हैं, जो लंबे समय तक नमी, ज्यादा नमी और क्लोराइड वाली समुद्री हवा के संपर्क में रहते हैं, जिससे स्टील और मजबूत कंक्रीट तेजी से खराब होते हैं। भारतीय पोर्ट, कोस्टल हाईवे, प्रâेट लाइन, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, मेट्रो रेल, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं में बढ़ते इन्वेस्टमेंट के साथ, एक्सपर्ट्स का कहना है कि ड्यूरेबिलिटी एक मुख्य डिजाइन चिंता होनी चाहिए, न कि सिर्फ एक सेकेंडरी पैâक्टर।

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