-हाई कोर्ट ने सबूतों पर उठाए सवाल, सभी आरोपी बरी
जेदवी / मुंबई
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों को ११ जुलाई २००६ को दहलाने वाले सिलसिलेवार बम धमाकों को २० वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन इस भीषण आतंकी हमले के जख्म आज भी नहीं भर पाए हैं। २० साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल वही है कि आखिर इन धमाकों के पीछे कौन था? सिमी, लश्कर-ए-तैयबा या इंडियन मुजाहिदीन? जांच एजेंसियां आज तक इस सवाल का ठोस जवाब देने में सफल नहीं हो सकी हैं।
इस मामले में महाराष्ट्र एटीएस ने २८ लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जिनमें से १३ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। वर्ष २०१५ में विशेष मकोका अदालत ने १२ आरोपियों को दोषी ठहराते हुए पांच को फांसी और सात को उम्रवैâद की सजा सुनाई थी। लेकिन जुलाई २०२५ में मुंबई हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने पैâसले में जांच प्रक्रिया और सबूत जुटाने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए कई महत्वपूर्ण खामियों की ओर इशारा किया।
हाई कोर्ट के पैâसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन शीर्ष अदालत ने पैâसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस निर्णय को अन्य मामलों में मिसाल के तौर पर नहीं माना जाएगा।
दो दशक बाद यह पूरा घटनाक्रम जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जिन परिवारों ने इस हमले में अपने अपनों को खोया, उनके लिए इंसाफ आज भी अधूरा है। असली साजिशकर्ताओं की पहचान और उन्हें सजा दिलाने का उद्देश्य अब तक पूरा नहीं हो सका है।
पश्चिम रेलवे ने सातों धमाका स्थलों पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
७/११ मुंबई लोकल ट्रेन बम धमाकों की २०वीं बरसी पर पश्चिम रेलवे ने शनिवार को माटुंगा रोड, माहिम, बांद्रा, सांताक्रुज, जोगेश्वरी, बोरीवली और भायंदर स्टेशनों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया। वरिष्ठ रेल अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर दिवंगतों को नमन किया और दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
