मुख्यपृष्ठनए समाचारमहायुति सरकार को सुप्रीम कोर्ट की ‘सर्वोच्च' फटकार...वर्ना सबके सामने बेनकाब कर...

महायुति सरकार को सुप्रीम कोर्ट की ‘सर्वोच्च’ फटकार…वर्ना सबके सामने बेनकाब कर देंगे!

-गृह विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल

-एक दिन पहले ही फडणवीस ले रहे थे श्रेय

सामना संवाददाता / मुंबई

एक दिन पहले विधानसभा में सीएम और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़े जोरदार तरीके से भारी भरकम आंकड़ों के साथ गृह विभाग की पीठ थपथपाई और देश में सबसे बेहतर कानून व्यवस्था संचालन का दावा किया, लेकिन दूसरे ही दिन महायुति सरकार और राज्य के गृह विभाग की कार्यशैली पर सुप्रीम कोर्ट ने जोरदार फटकार लगाई। इतना ही नहीं, सुधर जाने की चेतावनी भी दी।
अदालत ने शनिवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि महाराष्ट्र सरकार जमानत याचिकाओं का तो जोरदार विरोध करती है, लेकिन आपराधिक मामलों की सुनवाई समय पर पूरी कराने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाती। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह रवैया जारी रहा तो सरकार को ‘सार्वजनिक रूप से बेनकाब’ कर देंगे। इस टिप्पणी से महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग के काम काज पर सवाल उठने लगे हैं।
सरकार की दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ सुप्रीम कोर्ट
आरोपी विदेशी नागरिक की ओर से अदालत को बताया गया कि चार वर्षों में उसके मामले की ८६ बार सुनवाई सूचीबद्ध हुई, लेकिन उसे ५३ बार अदालत में पेश ही नहीं किया गया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर प्रशासनिक विफलता बताया और कहा कि यह आरोपी के त्वरित सुनवाई के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है।
पीठ ने कहा कि चार साल में ३४ गवाहों में से केवल दो के बयान दर्ज हो सके। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और न्याय व्यवस्था के लिए शर्मनाक है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जब राज्य सरकार किसी आरोपी की जमानत का विरोध करती है, तब मुकदमे की सुनवाई समय पर पूरी कराना भी उसकी जिम्मेदारी होती है। केवल जमानत का विरोध करना पर्याप्त नहीं है।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि अब प्रत्येक सुनवाई पर सभी आरोपियों को ट्रायल कोर्ट में पेश किया जा रहा है। हालांकि, इस पर भी सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए। साथ ही ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि हर सप्ताह कम से कम चार गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में यदि ऐसी लापरवाही सामने आई तो और भी कठोर आदेश पारित किए जाएंगे।

अन्य समाचार