सामना संवाददाता / मुंबई
मुंब्रा हादसे के बाद मध्य रेलवे ने सबक लेते हुए स्वचालित दरवाजों के अलावा एसी लोकल की तर्ज पर नॉन एसी लोकल में भी अंदर ही अंदर डिब्बे की कनेक्टिविटी बनाए जाने के पैâसले पर विचार कर रही है। रेलवे का तर्क है कि अंदर ही अंदर डिब्बे एक-दूसरे से जुड़े रहने के कारण यात्रियों की भीड़ विभिन्न डिब्बों में पैâल जाएगी, जिससे आने वाले स्टेशनों पर चढ़ने वाले यात्रियों के लिए दिक्कतें कम हो सकती हैं।
मध्य रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि अमूमन ऐसा देखा गया है कि कुछ डिब्बों में भीड़ अधिक होती है, वहीं कुछ डिब्बों में भीड़ थोड़ी कम होती है। क्योंकि लोकल ट्रेन के आने वाले स्टेशनों पर कई यात्री पहले से ही भीड़ वाले डिब्बे के पास खड़े होते हैं, जिससे उस डिब्बे में भीड़ अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में अगर डिब्बे एक दूसरे से जुड़ें रहेंगे तो यात्री आसानी से अधिक भीड़ वाली डिब्बे में से निकलकर कम भीड़ वाली डिब्बे में जा सकेंगे। हालांकि, रेलवे ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या एसी लोकल की तरह महिला डिब्बा भी अन्य डिब्बों से जुड़ा रहेगा या वह अलग ही रखा जाएगा।
इसके अलावा मध्य रेलवे के कुर्ला कारशेड ने गैर-वातानुकूलित (नॉन-एसी) लोकल ट्रेनों के लिए एक स्वचालित दरवाजा बंद करने की प्रणाली विकसित की है। यह एक नॉन-एसी ट्रेन के एक कोच में स्थापित किया गया है और संभावना है कि इसे रेलवे बोर्ड के चेयरमैन सतीश कुमार को आज मुंबई दौरे के दौरान दिखाया जाएगा। हालांकि, एक अधिकारी ने कहा कि यह अभी पुष्टि नहीं हुई है कि चेयरमैन इसका निरीक्षण सोमवार को करेंगे या नहीं।
वर्तमान में नॉन-एसी लोकल ट्रेनें खुले दरवाजों के साथ चलती हैं ताकि प्राकृतिक वेंटिलेशन (हवा का प्रवाह) बना रहे। हालांकि, स्वचालित दरवाजों को एक बड़ी सुरक्षा सुविधा माना जाता है, लेकिन संभावित घुटन की आशंका के कारण इसे लागू करना विवादास्पद रहा है। यह पहली बार नहीं है, जब रेलवे ने नॉन-एसी लोकल ट्रेनों में स्वचालित दरवाजे लगाने की कोशिश की हो। इससे पहले पश्चिम रेलवे ने ऐसे ही सिस्टम के दो परीक्षण किए थे, लेकिन दोनों ही परीक्षण सुरक्षा और संचालन मानकों पर खरे नहीं उतर सके और अंतत: परियोजना रद्द कर दी गई।
