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‘ठेकेदारों को सब माफ’!..ऐसा नया कानून बनाया है क्या?.. आदित्य ठाकरे का सीएम से सवाल

सामना संवाददाता / मुंबई

पुणे में मंत्रियों के पसंदीदा बिल्डरों द्वारा जमीन पर कब्जा, निवासियों की मर्जी से होने वाले पुनर्विकास के कार्यों को बिल्डर के फायदे के लिए स्थगित करना, सड़क खोदने वाले ठेकेदारों पर खास कृपा दिखाने जैसे मामले सामने आ रहे हैं। शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे ने इन मामलों को पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के समक्ष रखते हुए यह सवाल किया है कि क्या ‘ठेकेदारों को सब माफ’ है, क्या ऐसा कोई नया कानून बनाया गया है?
आदित्य ठाकरे ने कहा कि पुणे में पिछले कुछ महीनों से जो कुछ चल रहा है, उसे रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करना जरूरी है। उन्होंने इस संदर्भ में पत्र के जरिए जानकारी दी है। एक मामले में एक मंत्री के करीबी बिल्डर द्वारा हॉस्टल और धर्मशाला वाली जैन समाज की जमीन हड़पने की कोशिश की जा रही थी तो दूसरे मामले में लोकमान्य नगर की १६ एकड़ जमीन पर दूसरा बिल्डर कब्जा करना चाहता है। आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर खींचा है।

‘अच्छी सड़कें भी खोद रहे’
आदित्य ठाकरे ने पत्र में पुणे क्षेत्र में ऑप्टिक फाइबर के लिए दिए गए ठेके का उदाहरण भी दिया है। उन्होंने कहा कि पुणे में जो थोड़ी-बहुत अच्छी हालात में सड़कें हैं, उन्हें भी इस काम के लिए खोदा जाने वाला है। क्या इस तरह की खुदाई के लिए ठेकेदार से लिए जाने वाले मुआवजे की रकम महानगरपालिका लेगी? या फिर ‘ठेकेदार को सब माफ’ है, ऐसा कोई नया कानून बनाया गया है?
पुणे को निगलने की कोशिश करनेवाले बिल्डरों को न दें समर्थन!
लोकमान्य नगर के हजारों निवासियों ने स्व-पुनर्विकास का रास्ता चुनकर अपने-अपने बिल्डर तय करके आगे का काम शुरू कर दिया था। उनके प्रस्ताव भी मंजूर हो गए थे, लेकिन अचानक स्थानीय विधायक ने स्थगन की मांग की और मुख्यमंत्री कार्यालय ने तुरंत १५ मई २०२५ को उसे स्थगित कर दिया। यह स्थगन क्यों दिया गया? इसमें स्थानीय नागरिकों का क्या अपराध है? अगर उन्हें संपूर्ण लोकमान्य नगर का समेकित विकास नहीं चाहिए और वे अपने तय किए गए विकास चाहते हैं तो क्या यह उनका अधिकार नहीं है? आदित्य ठाकरे ने सवाल किया कि क्या उन पर सत्ताधारियों के लाडले बिल्डर को ‘समेकित विकास’ के रूप में थोपने की जरूरत है? उन्होंने पुणे को निगलने की कोशिश कर रहे बिल्डरों को समर्थन न देने की मांग भी की है।
पुणे क्षेत्र में ऑप्टिक फाइबर के लिए दिए गए ठेके का उदाहरण भी दिया है। उन्होंने कहा कि पुणे में जो थोड़ी-बहुत अच्छी हालात में सड़कें हैं, उन्हें भी इस काम के लिए खोदा जाने वाला है। क्या इस तरह की खुदाई के लिए ठेकेदार से लिए जाने वाले मुआवजे की रकम महानगरपालिका लेगी? या फिर ‘ठेकेदार को सब माफ’ है, ऐसा कोई नया कानून बनाया गया है? आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री से कहा है कि इस बारे में भी उन्हें अपने कार्यालय से सटीक जानकारी मंगवानी चाहिए।

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