-सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले के विभाग को ही नहीं पता, राज्य की सड़कों पर कितने गड्ढे; मुंबई से गांवों तक सड़कें बेहाल
सुनील ओसवाल / मुंबई
महाराष्ट्र में मानसून ने सड़कों की बदहाली की पोल खोल दी है। मुंबई सहित राज्य के अनेक हिस्सों में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। नागरिकों का आक्रोश बढ़ रहा है और कई स्थानों पर सड़क की खराब स्थिति के विरोध में आंदोलन हो रहे हैं। सत्तारूढ़ दल के विधायकों को भी जनता के सवालों और विरोध का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य के सार्वजनिक निर्माण विभाग के पास अब तक सड़कों पर बने गड्ढों की वास्तविक संख्या का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है।
अब सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने राज्य के सभी मुख्य अभियंताओं से सड़कों की स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मुख्य अभियंताओं को १० सितंबर तक गड्ढों की संख्या, सड़क रखरखाव और मरम्मत की स्थिति की जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। यानी जिस समय नागरिक गड्ढों से परेशान होकर सड़कों पर उतर रहे हैं, उस समय विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि आखिर उसकी सड़कों पर कितने गड्ढे हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि उनके नियमित रखरखाव और समय पर मरम्मत की निगरानी करना भी है। बारिश से पहले सड़कों की स्थिति की समीक्षा करना और संभावित रूप से खराब होने वाले मार्गों पर आवश्यक कदम उठाना विभाग की नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा होना चाहिए।
लेकिन बारिश के बाद जब सड़कें बदहाल हो गर्इं और जनता का आक्रोश सामने आने लगा, तब मुख्य अभियंताओं से गड्ढों की संख्या पूछी जा रही है। इससे मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले के विभागीय नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यदि विभाग के पास सड़कों की अद्यतन जानकारी थी, तो गड्ढों की संख्या जानने के लिए अब अलग से रिपोर्ट क्यों मांगी जा रही है? और यदि यह जानकारी उपलब्ध ही नहीं थी, तो मंत्री के स्तर पर विभाग के कामकाज की समीक्षा किस आधार पर हो रही थी?
