-पेपर लीक और भर्ती में कथित गड़बड़ियों से फूटा गुस्सा;
-अध्यक्ष-सचिव के इस्तीफे की मांग, सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम
सामना संवाददाता / पुणे
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों ने अब बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले लिया है। सोमवार को राज्यभर से आए हजारों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी पुणे की सड़कों पर उतर आए। ओंकारेश्वर मंदिर चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक निकाले गए विशाल ‘आक्रोश मोर्चे’ में छात्रों ने एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार और सचिव के इस्तीफे की मांग की।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में कथित पेपर लीक के बाद भी आयोग की कार्यप्रणाली में अपेक्षित पारदर्शिता नहीं आई। छात्रों ने २०२५ की राज्य सेवा मुख्य परीक्षा और कृषि सेवा परीक्षा की वर्णनात्मक उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में कथित त्रुटियों की जांच की भी मांग की है।
प्रदर्शनकारियों ने मुंबई क्राइम ब्रांच की प्राथमिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, गिरफ्तार एमपीएससी अंडर सेक्रेटरी अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल में हुई परीक्षाओं का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और कथित संदिग्ध चयन से जुड़े उम्मीदवारों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड की दोबारा जांच की मांग भी उठाई है। आंदोलन को विधायक रोहित पवार, विश्वजीत कदम सहित कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन मिला। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गर्इं तो पुणे में लंबा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सरकार ने भर्ती परीक्षा प्रणाली की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय समिति जरूर बनाई है, लेकिन छात्र अब आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई मांग रहे हैं। सवाल अब सिर्फ एक परीक्षा का नहीं है। सवाल उन लाखों युवाओं के भरोसे का है, जो वर्षों की मेहनत के बाद सरकारी नौकरी की परीक्षा में बैठते हैं।
सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम
एमपीएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों के विरोध में सोमवार को हजारों अभ्यर्थियों ने पुणे में आक्रोश मोर्चा निकाला। छात्रों ने अध्यक्ष विवेक भीमनवार व सचिव के इस्तीफे, परीक्षाओं के फॉरेंसिक ऑडिट और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग करते हुए सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया।
