-श्रृंगवेरपुर धाम में १०० मीटर के दायरे में चार जगह दरारें
सामना संवाददाता / प्रयागराज
भगवान राम के वनगमन से जुड़े धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले राम वनगमन पथ के लोकार्पण से पहले ही सड़क में धंसाव और दरारों ने निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रृंगवेरपुर धाम क्षेत्र में करीब १०० मीटर के दायरे में चार अलग-अलग स्थानों पर सड़क में दरारें दिखाई दी हैं। गंगा पुल के पास भी सड़क धंसने की बात सामने आई है।
गंगा पुल के पास भी धंसाव!
करीब ४,३०० करोड़ रुपए की लागत से अयोध्या से चित्रकूट तक लगभग २१० किलोमीटर लंबे राम वनगमन पथ का निर्माण किया गया है। परियोजना के लोकार्पण की तैयारी चल रही थी, लेकिन उससे पहले ही सड़क की सतह में दरारें और धंसाव सामने आने से निर्माण एजेंसी और निगरानी व्यवस्था दोनों कठघरे में आ गई हैं। यह परियोजना पीएनसी कंपनी से जुड़ी बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी लागत वाले धार्मिक और रणनीतिक महत्व के मार्ग की गुणवत्ता जांच आखिर किस स्तर पर की गई थी। यदि उद्घाटन से पहले ही सड़क में टूट-फूट शुरू हो गई है तो भारी यातायात और मानसून के दौरान इसकी स्थिति क्या होगी?
सरकारी जवाबदेही पर भी सवाल
मामला केवल एक सड़क की दरारों का नहीं है। यह उस ठेका प्रणाली पर भी सवाल है जिसमें हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं। अब जरूरी है कि सरकार केवल मरम्मत कर मामला न दबाए, बल्कि स्वतंत्र तकनीकी जांच कराए, जिम्मेदारी तय करे और यदि निर्माण में अनियमितता साबित हो तो ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों दोनों पर कार्रवाई करे।
