-प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की ’बुकमायशो’ पर बुकिंग; टिकट डिजिटल, एंट्री -क्यूआर कोड से और प्रोडक्शन क्रिकेट-फीफा जैसा-राजनीति का नया ‘इवेंट अवतार’
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
लो जी, जिस बात को विपक्ष और आलोचक वर्षों से कहते आए थे, उसे व्यवस्था ने शायद अब तकनीकी रूप से स्वीकार भी कर लिया है। प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सिर्फ ‘संबोधन’ नहीं, बाकायदा ‘शो’ है! तभी तो अब वहां जाने के लिए राजनीतिक कार्यकर्ता की पर्ची, सरकारी निमंत्रण या सामान्य प्रवेश व्यवस्था नहीं, बल्कि ’बुकमायशो’ की जरूरत पड़ रही है।
भाषण राजनीति का है, लेकिन प्रस्तुति किसी मेगा इवेंट की!
वडोदरा में ८ सितंबर को होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के लिए पहली बार ’बुकमायशो’ के जरिए मुफ्त ऑनलाइन पंजीकरण कराया गया। पंजीकरण के बाद डिजिटल एम-टिकट, लाइव क्यूआर कोड से सत्यापन और तकनीक आधारित प्रवेश व्यवस्था बनाई गई। बताया गया कि उपलब्ध सीटें करीब एक घंटे में भर गर्इं और ४२ हजार से ज्यादा लोग प्रतीक्षा सूची में पहुंच गए।
कहानी सिर्फ टिकट तक सीमित नहीं है। कार्यक्रम की तैयारियों में ४के कैमरे, क्रिकेट मैच और फीफा स्तर जैसा प्रसारण उत्पादन तथा प्रधानमंत्री के प्रवेश के लिए ऊंचा रैंप तक शामिल बताया गया है। यानी भाषण देश के लिए नहीं सिर्फ राजनीति का है, लेकिन प्रस्तुति किसी मेगा इवेंट की! सवाल बुक माय शो के इस्तेमाल का विरोध नहीं है। भीड़ प्रबंधन के लिए तकनीक का उपयोग सुविधाजनक भी हो सकता है। सवाल उस ‘राजनीतिक संस्कृति’ का है, जिसमें प्रधानमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रमों की भाषा धीरे-धीरे जनसभा से ज्यादा प्रोडक्शन, प्रâेम, कैमरा, प्रवेश और दृश्य प्रभाव की भाषा बनती जा रही है। बस अगला कदम शायद इतना ही बाकी है कि पोस्टर पर लिखा जाए-‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-लाइव!’ और नीचे छोटे अक्षरों में-‘सीटें सीमित हैं, अभी बुक करें!’
