-बिगड़े हालात, कई जगह बंट रहे कूपन
-कई जिलों में वाहनों की लगीं लंबी कतारें
सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य में पेट्रोल और डीजल की किल्लत अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगी है। राज्य के कई जिलों में र्इंधन संकट गहराने से पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पंप संचालकों, ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच विवाद तथा मारपीट की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। सरकार लगातार पर्याप्त र्इंधन उपलब्ध होने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है।
सबसे ज्यादा असर विदर्भ और मराठवाड़ा के जिलों में देखने को मिल रहा है। बुलढाणा जिले में डीजल की भारी किल्लत के कारण ट्रैक्टर, मालवाहक वाहन और निजी गाड़ियों की लंबी लाइनें पेट्रोल पंपों के बाहर देखी जा रही हैं। कई जगह घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को पर्याप्त डीजल नहीं मिल पा रहा है।
रोज जारी हो रहे हैं डीजल के २०० कूपन!
राज्य में पेट्रोल-डीजल की स्थिति काफी नाजुक है। ग्रामीण भाग में डीजल के लिए काफी मारामारी है। स्थिति को संभालने के लिए मेहकर-चिखली मार्ग स्थित काठाले पेट्रोल पंप संचालक ने अनोखा तरीका अपनाया है। वहां डीजल लेने आने वाले ग्राहकों को कूपन बांटे जा रहे हैं। पिछले चार-पांच दिनों से लागू इस व्यवस्था के तहत प्रतिदिन केवल २०० कूपन जारी किए जा रहे हैं। कूपन दिखाने पर ही ग्राहकों को पेट्रोल या डीजल दिया जा रहा है। इस व्यवस्था से पंप पर भीड़ कुछ हद तक नियंत्रित हुई है और विवाद तथा मारपीट की घटनाओं में कमी आई है। ग्राहकों को यह भरोसा मिल रहा है कि लंबी प्रतीक्षा के बाद उन्हें र्इंधन जरूर मिलेगा। स्थानीय स्तर पर इस पहल की सराहना भी की जा रही है। हालांकि, दूसरी ओर राज्य सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि महाराष्ट्र में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
तो फिर लंबी कतार क्यों?
सवाल यह उठ रहा है कि यदि राज्य में र्इंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है तो फिर पेट्रोल पंपों पर इतनी अफरा-तफरी क्यों मची हुई है? आखिर क्यों आम जनता को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है? राज्य में लगातार बढ़ती कतारें और बिगड़ती स्थिति ने सरकार के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवहन, खेती और रोजमर्रा के कामकाज पर इस संकट का असर साफ दिखाई देने लगा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।
