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फडणवीस सरकार का आदेश बेअसर!

-शिंदे गुट के परिवहन विभाग पर उठे सवाल; पेठ के पास कथित अनधिकृत जांच चौकी, सरकार की नजर क्यों नहीं पड़ी?
-नासिक में अब भी ‘आरटीओ नाका’ बरकरार?

सुनील ओसवाल / मुंबई

महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा करने वाली फडणवीस सरकार के सामने नासिक के पेठ इलाके से जुड़ा एक गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। सीमा जांच चौकियों को बंद करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद पेठ के पास कथित तौर पर एक अनधिकृत जांच चौकी वर्षों से संचालित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। सवाल सीधा है। यदि यह चौकी वास्तव में अनधिकृत है तो इतने वर्षों तक किसकी नजरों के सामने यह व्यवस्था चलती रही?
परिवहन विभाग फिलहाल शिंदे गुट के पास है और प्रताप सरनाईक राज्य के परिवहन मंत्री हैं। ऐसे में नासिक के कथित चेक पोस्ट को लेकर उठ रहे सवाल सीधे परिवहन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण तक पहुंचते हैं। मामला केवल किसी स्थानीय अधिकारी की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं रह जाता। असली सवाल यह है कि सरकार के आदेश आखिर जमीन पर लागू क्यों नहीं हो रहे हैं।
व्यवस्था-क्या यही है ‘जीरो टॉलरेंस’?
नासिक आरटीओ में अधिकारी प्रदीप शिंदे की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पदोन्नति के बाद भी उनका तबादला नहीं होने की चर्चा के बीच पेठ के पास कथित अनधिकृत चेक पोस्ट का मामला सामने आया है। हालांकि, दोनों मामलों के बीच किसी सीधे संबंध का दावा करना जल्दबाजी होगी। लेकिन प्रशासनिक पारदर्शिता की दृष्टि से यह सवाल जरूर उठता है कि नासिक आरटीओ के अधिकार क्षेत्र में कथित रूप से वर्षों से चल रही इस व्यवस्था की विभागीय स्तर पर कभी जांच हुई या नहीं।
यदि शिकायतें मिली थीं तो उनकी जांच किसने की? क्या किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई? क्या परिवहन आयुक्त कार्यालय को इसकी रिपोर्ट भेजी गई? इन सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए।
रकम वसूली के आरोप, जांच जरूरी
पेठ के पास कथित अनधिकृत चेक पोस्ट पर वाहन चालकों से रकम वसूले जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच जरूरी है। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि वहां कर्मचारी किसके आदेश पर तैनात थे, वाहनों की जांच किस नियम के तहत की जाती थी, उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या रजिस्टर रखा जाता था या नहीं और कथित रूप से वसूली गई रकम का कोई सरकारी हिसाब था या नहीं।
मामला सिर्फ नाके का नहीं, सरकारी निगरानी का है!
यह मामला केवल एक कथित चेक पोस्ट तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि सरकार का आदेश आखिर लागू कौन कराएगा? अगर पेठ के पास संचालित जांच चौकी अधिकृत थी, तो उसका आदेश कहां है? उसकी वैधता किस नियम के तहत थी? और यदि वह अनधिकृत थी, तो इतने वर्षों तक उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? फडणवीस सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नीति का दावा करती है। अब नासिक का यह मामला उसी दावे की परीक्षा बन गया है। सरकार को स्पष्ट करना होगा कि पेठ के पास कथित चेक पोस्ट किसकी जानकारी में चल रहा था और शिकायतों के बावजूद अब तक क्या कार्रवाई की गई।
आदेश हुआ, फिर नाका बंद क्यों नहीं हुआ?
सीमा जांच चौकियों को लेकर सरकार अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुकी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सीमा चौकियों को बंद करने की दिशा में प्रस्ताव और कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद नासिक में वर्षों से कथित रूप से चल रही इस व्यवस्था की शिकायतें सामने आना प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि पेठ के पास वर्षों से कोई जांच चौकी संचालित हो रही थी, तो क्या परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी थी? यदि जानकारी थी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी नहीं थी तो फिर विभाग की निगरानी व्यवस्था किस काम की है?

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