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खडसे को अपनों ने दिया दगा!

-जिसे राजनीति सिखाई, वही सम्मान समारोह से रहे दूर
-फडणवीस-महाजन अमृत महोत्सव में नहीं पहुंचे; भाजपा को खड़ा करने वाले नेता के सम्मान से बनाई दूरी

रामदिनेश यादव / मुंबई

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर रिश्तों और राजनीतिक वफादारी पर सवाल खड़े हो गए हैं। वरिष्ठ नेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक एकनाथ खडसे के अमृत महोत्सव समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मंत्री गिरीश महाजन सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी ने सियासी गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया है।
खडसे ने अपने अमृत महोत्सव समारोह के लिए मुख्यमंत्री फडणवीस सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं को बाकायदा निमंत्रण दिया था। इसके बावजूद समारोह में भाजपा का कोई वरिष्ठ नेता नजर नहीं आया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस नेता ने महाराष्ट्र में भाजपा को मजबूत करने के लिए दशकों तक संघर्ष किया, आज उसी के सम्मान समारोह से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने दूरी क्यों बनाई?
खडसे ने अपने राजनीतिक सफर में भाजपा को महाराष्ट्र में मजबूत करने के लिए लंबा संघर्ष किया। गिरीश महाजन को राजनीति में आगे बढ़ाने में भी खडसे की भूमिका की चर्चा होती रही है। वहीं देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक सफर के शुरुआती दौर में भी खडसे सहित वरिष्ठ नेताओं के मार्गदर्शन का उल्लेख किया जाता रहा है। ऐसे में खडसे के ७५वें जन्मदिन पर आयोजित अमृत महोत्सव समारोह में पुराने राजनीतिक साथियों की गैरहाजिरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
खडसे ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ
राजनीति में कहा जाता है कि न कोई स्थायी मित्र होता है और न कोई स्थायी शत्रु। इसी राजनीतिक समझ के साथ खडसे ने अपने अमृत महोत्सव के बहाने पुराने राजनीतिक विरोधियों की ओर भी दोस्ती का हाथ बढ़ाया था, लेकिन समारोह में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या खडसे के बढ़ाए दोस्ती के हाथ को स्वीकार नहीं किया गया? खासकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मंत्री गिरीश महाजन जैसे वरिष्ठ नेताओं का समारोह से दूर रहना इस पूरे घटनाक्रम को और राजनीतिक रंग दे रहा है। कभी भाजपा के लिए संघर्ष करने वाले खडसे आज भाजपा से अलग राजनीतिक राह पर हैं। ऐसे में अमृत महोत्सव के मंच से लेकर भाजपा के गलियारों तक एक ही सवाल गूंज रहा है। क्या सत्ता की राजनीति में पुराने रिश्तों और संघर्ष की कोई कीमत नहीं बची?

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