शीतल अवस्थी
दीपावली पांच दिवसीय शक्ति उपासना का काल है, जिसमें महालक्ष्मी स्वरूपा जगतजननी की उपासना का विशेष महत्व है। महालक्ष्मी की उपासना जीवन से दरिद्रता व कलह का अंधकार दूर कर धन व सुख-संपन्नता देने वाली मानी गई है। दीप महोत्सव के पांच दिनों तक मंत्र साधना से भारी लाभ हो सकता है।
दीपावली के पांच दिनों में हर दिन देव विशेष की उपासना से अलग-अलग कामना पूर्ति का महत्व है, किंतु इन कामनाओं से जुड़े श्री यानी सुख और ऐश्वर्य के ही अलग-अलग रूप हैं। इनमें सुख, समृद्धि, सम्पत्ति, स्वास्थ्य, सम्मान सभी कामनाएं शामिल हैं। इसलिए शास्त्रों में इन पांचों ही दिन उपासना के लिए विशेष मंत्रों का जप पद, यश व सुख-सुविधाओं, खासतौर पर धन कामना को पूरा करने वाला बताया गया है।
ये मंत्र विशेष धनकामना पूर्ति में आसान ही नहीं है, बल्कि चमत्कारी भी माने जाते हैं। नौकरीपेशा, कारोबारी हो या रोजगार की चाहत रखने वाला सभी के लिए ये मंत्र बेशुमार धनार्जन व खुशहाली का रास्ता खोलते हैं। आस्था व श्रद्धा के साथ की गई वंदना भी यथाशीघ्र लक्ष्मीकृपा देने वाली मानी गई है। धन प्राप्ति के लिए लक्ष्मी कृपा प्राप्त करना अति आवश्यक है। महालक्ष्मी की प्रसन्नता के बिना कोई भी धन प्राप्त नहीं कर सकता। धनतेरस से लेकर भाई दूज तक हर रोज स्नान के बाद देवी लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर की लाल पूजा सामग्रियों जिनमें लाल चंदन, लाल गुलाब या गुड़हल का फूल, लाल अक्षत, लाल
वस्त्र या मौली, नैवेद्य में लाल फल शामिल हो, अर्पित करें। पूजा के बाद अगरबत्ती व धूप लगाकर नीचे लिखे लक्ष्मी गायत्री मंत्र का स्मरण या कम से कम १०८ बार लाल आसन पर पूर्व दिशा की ओर बैठकर जप करें व लक्ष्मी आरती करें-
ॐ महालक्ष्मीश्च विद्महे,
विष्णु पत्नीश्च धीमहि,
तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात्।
महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस अचूक मंत्र का पांचों दिन जप करें, जो कि देवी लक्ष्मी को अति प्रिय है। दीपावली के पांचों दिन इस मंत्र का जप विधि-विधान से करें, वर्षभर आपको धन की कोई कमी नहीं होगी।
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी, महासरस्वती ममगृहे आगच्छ-आगच्छ ह्रीं नम:।
इस मंत्र को दीपावली की रात कुंकुम या अष्टगंध से पूजन की थाली पर भी लिखें। महालक्ष्मी की विधिवत पूजा करने के बाद इस मंत्र के १८०० या जितना कर सकें जप करें। इसके प्रभाव से आपको वर्षभर अपार धन प्राप्ती हो सकती है। ध्यान रहे मंत्र जप के दौरान पूर्णत: धार्मिक आचरण रखें। मंत्र के संबंध में कोई शंका मन में ना लाएं अन्यथा मंत्र निष्फल हो सकता है।
दीपावली की रात में लक्ष्मी-सरस्वती और कुबेर देव का पूजन करें और इस मंत्र का जप कम से कम १०८ बार करें।
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय, धन-धान्यधिपतये धन-धान्य समृद्धि मम देहि दापय स्वाहा।
पवित्र अवस्था में लाल वस्त्र आसन पर विराजमान होकर, लाल वस्त्र पर गुलाब के फूल की पंखुड़ियां बिछाकर, श्रीमहालक्ष्मी यंत्र को रखकर, पांच दिए शुद्ध घी के दीए जलाकर और यथासंभव लक्ष्मी पूजन कर कमलगट्टे की माला से निम्न मंत्र की इक्कीस या इक्यावन माला का जप करें। नित्य एक माला करें।
ॐ ह्रीं ऐं व्यापार वृद्धि ॐ नम:
यदि बेरोजगार हैं तो अपना मनपसंद रोजगार प्राप्त करने के लिए दीपावली के दिन निम्न मंत्र का जाप करें। श्रद्धापूर्वक किए गए जप का निश्चित ही लाभ होगा। पवित्र होकर प्रात:
किसी कुश के आसन पर उत्तर-पूर्व में मुंह करके बैठे और दीपावली से नित्य १, ५, ७ या ११ माला निम्न मंत्र की करें। कार्य सिद्ध होगा।
ॐ कार्य सिद्धिं ॐ नम:
दीपावली की रात्रि को किया गया जप या हवन तत्काल फल प्रदान करता है तथा इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। बहुत से व्यापारी बंधु इस रात्रि का लाभ उठाकर अपने व्यापार में उन्नति प्राप्त कर सकते हैं। जो लोग बेरोजगार हैं या जिनके व्यापार में घा:ा जा रहा है उन्हें यह निष्ठापूर्वक करने से निश्चित ही रोजगार मिलेगा और व्यापार में भी उन्नति होगी।
