– आठ-आठ संगीन धाराओं को नजरअंदाज कर रही है फडणवीस की पुलिस
– फ्लैटधारक आंदोलन को मजबूर
प्रेम यादव / मीरा-भायंदर
मीरा-भायंदर के नयानगर स्थित ओस्तवाल पैराडाइज में करोड़ों की ठगी, अवैध निर्माण और फर्जी दस्तावेजों के गंभीर मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। फर्जी सीसी, झूठा एमओयू और नकली नक्शों के सहारे लोगों को गुमराह कर फ्लैट बेचने वाले बिल्डर उमराव सिंह ओस्तवाल और उनके बेटे के खिलाफ आठ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।
पैराडाइज के फ्लैटधारकों का कहना है कि राज्य सरकार और पुलिस का रवैया बिल्डर को खुला संरक्षण दे रहा है। फडणवीस सरकार की छवि अब सवालों में है। जब आम नागरिक न्याय के लिए गुहार लगाते हैं और आरोपी खुलेआम निर्माण करते हैं तो यह कानून की विफलता नहीं तो और क्या है? अब फ्लैटधारक आंदोलन करने को मजबूर हो गए हैं।
एमओयू में दो साल का वादा किया, जिसमें दो वर्षों में कन्वेयंस डीड और ओसी देने का झांसा देकर गुमराह किया। साथ ही फर्जी नक्शों से फ्लैट बेचे गए और बिना मंजूरी के एफएसआई जोड़ी गई, मनपा की आंखों के सामने बहुमंजिला निर्माण शुरू है, लेकिन न टाउन प्लानिंग विभाग जागा, न पुलिस। इन सबके बीच पुलिस और मनपा अधिकारियों की गहरी सांठगांठ की आशंका जताई जा रही है।
अब सवाल यह है कि जब सारे दस्तावेज, गवाही और शिकायतें सामने हैं तो फडणवीस सरकार की पुलिस अब तक चुप क्यों है? कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया। अब लोगों को न्याय मिलेगा या यह मामला भी फाइलों के ढेर में गुम हो जाएगा यह सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है।
मामले की मुख्य बातें:
ओस्तवाल पैराडाइज: मीरा-भायंदर के नयानगर स्थित इस प्रोजेक्ट में करोड़ों की ठगी और अवैध निर्माण का आरोप है।
फर्जी दस्तावेज: बिल्डर पर फर्जी सीसी, झूठा एमओयू और नकली नक्शों के सहारे लोगों को गुमराह करने का आरोप है।
पुलिस की कार्यशैली: एफआईआर दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
धाराएं: एफआईआर में आईपीसी की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, लेकिन सबसे अहम धारा ४६७ (महत्वपूर्ण दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा) को लगाया नहीं गया है।
ये लगीं धाराएं
एफआईआर में आईपीसी की धारा ४२० (धोखाधड़ी), ४०६ (विश्वासघात), ४६५, ४६६, ४६८ (दस्तावेजों की जालसाजी), ४७१, ४७२, ४७४ (फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग) और ३४ (साजिश) जैसी धाराएं लगाई गई हैं। इसके बावजूद पुलिस ने अब तक किसी को हिरासत में नहीं लिया है।
`हमने पुलिस को नकली नक्शे, झूठा एमओयू, टाउन प्लानिंग के आदेश जैसे हर सबूत दिया। शिकायत के बाद एफआईआर होने में १६ महीने लग गए। बिल्डर को गिरफ्तारी से बचाने के लिए गंभीर धाराओं से आईपीसी की धारा ४६७ नहीं लगाई गई। यहां तक कि एफआईआर दर्ज होने के बाद आज तक न एक गिरफ्तारी हुई, न जांच आगे बढ़ रही है। अगर हम जैसे जागरूक नागरिकों को भी इंसाफ नहीं मिलेगा, तो आम जनता कहां जाएगी?’
-रंजीत झा, सचिव, ओस्तवाल पॅराडाइज सोसायटी
`हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं, सभी लोगों को नोटिस भेजा गया है और अभी तक जांच चल रही है। हमने महानगरपालिका से भी दस्तावेज मांगे हैं और हम जानकारी जुटा रहे हैं। इस मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी धाराएं भी बढ़ाई जाएंगी और नामजद आरोपियों की संख्या भी बढ़ सकती है, जो दोषी होगा, उस पर कार्रवाई जरूर होगी’
-भास्कर पुकले, सहायक पुलिस आयुक्त, आर्थिक अपराध शाखा
