-दशरथ के निधन और भरत के भ्रातृ-प्रेम के मंचन ने किया दर्शकों को मंत्रमुग्ध
राजेश सरकार / प्रयागराज
स्वदेशी कॉटन मिल ग्राउंड में सार्वजनिक रामलीला समिति ट्रस्ट की ओर से आयोजित भव्य रामलीला ‘कथा सियाराम की’ के चतुर्थ दिवस बुधवार को कैकेयी-मंथरा संवाद, प्रभु श्रीराम के वनवास, महाराज दशरथ के निधन और भरत मिलाप के मार्मिक प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के त्याग, पिता के वचन की मर्यादा और भरत के अद्वितीय भ्रातृ-प्रेम की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रामलीला के दौरान मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से दो वरदान मांगने का प्रसंग सामने आया। कैकेयी के वरदानों के चलते प्रभु श्रीराम को चौदह वर्ष के वनवास पर जाने का आदेश मिला। पिता के वचन की रक्षा के लिए श्रीराम ने बिना किसी विरोध के वन जाने का निर्णय स्वीकार किया। उनके इस त्याग और आज्ञाकारिता ने मर्यादा तथा कर्तव्यपालन का संदेश दिया। श्रीराम के वियोग में महाराज दशरथ के प्राण त्यागने का दृश्य भी अत्यंत मार्मिक रहा।
इसके बाद भरत मिलाप के प्रसंग ने वातावरण को भावुक कर दिया। भरत का श्रीराम के प्रति समर्पण और भ्रातृ-प्रेम दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा। मंचन ने यह संदेश दिया कि सत्ता और राजपाट से बढ़कर परिवार के प्रति प्रेम, त्याग और नैतिक मूल्यों का महत्व है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पारस हॉस्पिटल की टीम के साथ डॉ. ओपी पांडेय उपस्थित रहे। समिति के संरक्षकों एवं पदाधिकारियों ने आपसी समन्वय और समर्पण के साथ आयोजन की व्यवस्थाएं संभालीं। दर्शकों की सुविधा से लेकर मंचन की व्यवस्था तक समिति के सदस्यों ने सक्रिय योगदान दिया।
समिति की ओर से अतिथियों, रामभक्तों और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा और आदर्श जीवन-मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
