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मतदाता सूची में खेला…७ महीनों में १४ लाख नए वोटर!

-चुनावी मशीनरी पर सवालों का बम

सामना संवाददाता / मुंबई

महाराष्ट्र की मतदाता सूची पर शक और गहरा गया है। महज सात महीनों में १४.७१ लाख नए मतदाता जुड़ जाना कोई मामूली बात नहीं है। विधानसभा चुनावों के बाद चुनाव आयोग पर पहले ही वोट चोरी और हेरा-फेरी के आरोप लग चुके थे और अब यह नया आंकड़ा विपक्ष के पुराने दावों को और पुख्ता कर रहा है। स्थानीय चुनावों से ठीक पहले वोटर लिस्ट में यह रहस्यमयी बढ़ोतरी साफ इशारा करती है कि कहीं न कहीं चुनावी तंत्र में सिस्टमेटिक गड़बड़ी और मनमानी का खेल जारी है।
विधानसभा चुनाव के बाद अचानक फूली-फली वोटर लिस्ट
महाराष्ट्र राज्य में मतदाताओं की संख्या २७ नवंबर २०२४ से ३० जून २०२५ के बीच ९ करोड़ ७० लाख २५ हजार ११९ से बढ़कर ९ करोड़ ८४ लाख ९६ हजार ६२६ तक पहुंच गई है। इस अवधि में १८,८०,५५३ नए मतदाताओं का पंजीकरण हुआ। इनमें से पुराने मतदाताओं के नाम हटाने के बाद कुल १४ लाख ७१ हजार ५०७ मतदाताओं की वास्तविक वृद्धि हुई है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान छह महीनों में ४० लाख से ज्यादा मतदाता बढ़े थे। विधानसभा चुनावों की मतदाता सूची का उपयोग स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों के लिए करने का विचार था, लेकिन अब यह निर्णय लिया गया है कि एक जुलाई २०२५ तक की अद्यतन सूची ही अंतिम मानी जाएगी। चूंकि मतदाता पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है इसलिए यह निर्णय किया गया है। इस तरह की जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग ने दी है। फिलहाल, चुनाव आयोग के इस पैâसले का सीधा असर स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों पर होगा। अनुमान जताया गया है कि राज्य में स्थानांतरण के कारण मतदाता संख्या बढ़ी है।
मुंबई उपनगर में ९५,६३० नए मतदाता जुड़े हैं। इसके साथ ही वहां कुल मतदाताओं की संख्या ७७.८१ लाख हो गई है। मुंबई शहर में १८,७४१ नए मतदाता बढ़े हैं, जिससे मुंबई शहर के मतदाताओं की संख्या २५.६२ लाख तक पहुंच गई है। नवंबर से अब तक मुंबई महानगर में १.१४ लाख नए मतदाताओं का पंजीकरण हुआ है। इस वजह से मुंबई मनपा चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर १.०३ करोड़ हो गई है।

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