तड़का
गणेशोत्सव हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का आयोजन है। इस बार गणेशजी का आगमन कल हो रहा है। हर जगह भक्ति, उत्साह और सामाजिक एकजुटता का माहौल है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उत्सव शांति से संपन्न हो और कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे। इसी सोच से पुणे के जिलाधिकारी ने गणेशोत्सव के दौरान शहर में १२ दिनों तक शराब की बिक्री पर रोक लगाई थी। हाई कोर्ट ने इस पर आपत्ति की और पूछा कि ऐसी पाबंदी केवल पुणे में ही क्यों? महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों ऐसी कोई रोक नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी पाबंदी से पुणे और वहां के निवासियों की छवि पर सवाल उठ सकता है। क्या शराब पीने के बाद केवल पुणे के लोग ही गलत व्यवहार कर सकते हैं? अदालत ने प्रशासन को अपने आदेश पर पुनर्विचार करने को कहा। इसके बाद जिलाधिकारी ने प्रतिबंध का आदेश वापस ले लिया है। हाई कोर्ट की बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी एक जिले में प्रतिबंध लगाने का निर्णय समानता और तार्किकता के आधार पर उचित नहीं है। खासकर तब, जब शराब की बिक्री के लिए महाराष्ट्र में लाइसेंस की व्यवस्था है और राज्य को इससे बड़ा राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन दूसरी तरफ प्रशासन की मंशा भी गलत नहीं है। गणेशोत्सव के दौरान लाखों की भीड़ होती है। बड़ी संख्या में जुलूस, मंडप, विसर्जन कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन होते हैं। भीड़ में शराब के नशे में उपद्रव, महिलाओं से दुर्व्यवहार, झगड़े, सड़क दुर्घटनाएं या कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा न हो, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। गणेशोत्सव शांतिपूर्ण और अनुशासित रहे यह अच्छी मंशा है। सभी को पता है कि शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लेकिन ढेर सारे लोग इसका सेवन करते ही हैं। ऐसे पूरे शहर में लंबे समय तक शराब पर प्रतिबंध लगेगा तो सवाल उठेंगे। मुद्दा शराब बेचने से कहीं ज्यादा जिम्मेदारी का है। जो लोग शराब पीते हैं, उन्हें यह समझना होगा कि सार्वजनिक उत्सव में शराब पीकर हुड़दंग करना, तेज वाहन चलाना, दूसरों को परेशान करना या कानून-व्यवस्था बिगाड़ना स्वीकार्य नहीं हो सकता। गणेशोत्सव आस्था और आनंद का पर्व है, किसी दूसरे व्यक्ति की परेशानी का कारण बनने का लाइसेंस नहीं। प्रशासन को भी उन्हीं स्थानों और परिस्थितियों पर ध्यान देना चाहिए जहां कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की आशंका हो। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस व्यवस्था, ड्रिंक एंड ड्राइव की सख्त जांच, सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी और उपद्रव करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई जैसे उपाय ज्यादा व्यावहारिक हैं। गणेशोत्सव में भक्ति भी हो, उत्साह भी हो और अनुशासन भी।
नशे में हुड़दंग करने वालों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए। लेकिन पूरे शहर के लाइसेंस प्राप्त कारोबार को कई दिनों तक बंद करना उचित नहीं है। बप्पा का उत्सव प्रशासन, श्रद्धालुओं और समाज तीनों की जिम्मेदारी है। शराब के नशे में शांति भंग करना सामाजिक गैरजिम्मेदारी है। पीने वालों को यह ध्यान रखना होगा।
