कभी तो तू भी मेरे दिल के पास आएगा
मुझे भी अपना समझ करके तू मनाएगा
दिया था दिल ये समझ कर कि तू मेरा ही है
नहीं पता था कि तू ज़ुल्म इतने ढाएगा
है आँसुओं से यूँ भीगा हुआ चमन मेरा
ये सोचती हूँ कभी तू मुझे हँसायेगा
यही तो सोच के तुझसे ये दिल लगाया था
कि तू भी साथ मेरे रस्मों को निभाएगा
कनक यही तो लिखा था तुम्हारी किस्मत में
सनम तुम्हारा किसी और का हो जाएगा
डॉ कनक लता तिवारी
